देहरादून। जैसी कि संभावनाएं जताई जा रही थी कि प्रवासियों की वापसी के साथ राज्य में कोरोना संक्रमण तेज गति से बढ़ेगा, उसके प्रमाण अब सामने आने लगे है। दिल्ली और मुम्बई से लौटे प्रवासियों के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि से यह साफ हो गया है कि अब राज्य का कोई भी हिस्सा इससे अछूता रहने वाला नहीं है। क्योंकि घर वापस लौटने वाले अधिकांश प्रवासी पहाड़ के गांवो के रहने वाले है।
राज्य में अब कोरोना संक्रमितों की संख्या अब 75 तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि बीते एक सप्ताह में 12 नये मामले सामने आये है और यह सभी बारह लोग बाहर से आने वाले है। राज्य में पहला केस 15 मार्च को सामने आया था। डेढ़ माह में राज्य में सिर्फ 60 के करीब मामले आये थे लेकिन अब एक सप्ताह में 12 मामले सामने आ चुके है। यह स्थिति तब है जब पहाड़ से लौटने वालों का टेस्टिंग न के बराबर है। अगर इन सभी का टेस्ट किया जाये तो बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो सकते है।
राज्य के अगर उन नौ पर्वतीय जिलों में जिन्हे ग्रीन जोन में रखा गया है का सेम्पलिंग रेट औसतन डेढ़ फीसदी है जो चैकांने वाला है। कई जनपद तो ऐसे भी है जहंा अब तक सिर्फ एक या दो लोगों का ही टेस्ट हुआ है। वहीं पौड़ी में सौ लोगों के सेम्पल जांच के लिए भेजे गये है। भले ही स्वास्थ्य निदेशक डा. उप्रेती 2500 रोज टेस्टिंग की बात कह रही हो लेकिन यह टेस्टिंग सिर्फ चार जिलों तक ही सीमित है।
बीते दिनों मुख्यमंत्री ने यह आंशका जताई थी कि आने वाले 2 लाख प्रवासियों में 25 हजार संक्रमित हो सकते है। लेकिन सवाल यह है कि जब राज्य के पास इतनी बड़ी संख्या में बीमारों का इलाज कराने की सुविधांए उपलब्ध नहीं है तो फिर क्या होगा? वहीं अगर संक्रमण गांवो तक पहुंचा तब क्या स्थिति होगी। संक्रमित मिलने वाले प्रवासियों के सम्पर्क में आने वालों की तलाश कैसे होगी? इन सवालोें को लेकर अब शासनकृप्रशासन हैराने और परेशान है।

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