ऋषिकेश,07मार्च( AKA)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान  ऋषिकेश में विश्व लिंफेडीमा दिवस के उपलक्ष्य में चिकित्सकों व नर्सिंग ऑफिसरों को हाथी पांव नामक बीमारी की रोकथाम पर चर्चा की गई और इसके कारण, लक्षण एवं उपचार प्रणाली के प्रति जागरुक किया गया।शनिवार को  एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत  ने बताया कि संस्थान में हाथी पांव जैसी जटिल बीमारी का उपचार शुरू कर दिया गया है, एम्स जल्द ही इस विषय में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी केलीफोर्निया के साथ मिलकर इस रोग के नए उपचार पर रिसर्च कार्य करेगा। एम्स संस्थान के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के तत्वावधान में विश्व लिंफेडीमा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने व्याख्यान के जरिए इस बीमारी के बाबत विस्तृत जानकारी दी।एम्स निदेशक  रवि कांत  ने बताया कि हाथी पांव नामक बीमारी में जन्मजात पैरों में सूजन रहता है, इस तरह की बीमारी कैंसर के बाद और चलने फिरने में असमर्थ बुजुर्ग लोगों में भी पाई जाती है। इस बीमारी में मुहं आदि शरीर के किसी भी दूसरे अंग में भी सूजन आ सकती है। उन्होंने बताया कि भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी इस बीमारी से ग्रसित मरीज पाए जाते है।उन्होंने बताया कि इस बीमारी में त्वचा को साफ रखना, सामान्य साफ सफाई की ओर विशेष ध्यान रखना जरुरी है। शरीर में कोई भी दूसरी बीमारी हो तो उससे लिंफेडीमा की समस्या और अधिक बढ़ जाती है। संस्थान के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. विशाल मागो ने बताया कि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी के मार्गदर्शन में विभाग ने लिफेडीमा रोग की ओपीडी हर शुक्रवार को दोपहर 2 से 4 बजे शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी को लेकर अधिकांश मरीज लापरवाह रहते हैं और उपचार नहीं कराते। जिससे बीमारी के बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। लिहाजा संस्थान इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर जनजागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन भी करेगा।इस अवसर पर संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, स्त्री रोग विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक प्रोफेसर शशि प्रतीक, प्लास्टिक चिकित्सा विभाग की डा. मधुवरी वाथुल्या, डा. देवरति चटोपाध्याय, डा. अल्ताफ मीर, डा. अक्षय कपूर,  डा. नीतू कोचर,डा.शशिभूषण गोगिया,डा. हरिओम प्रसाद के अलावा सीनियर व जूनियर रेजिडेंट्स चिकित्सक, नर्सिंग स्टूडेंट्स मौजूद थे।

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