16 मार्च को  अतिक्रमण की जद में आए मंदिरों को हटाए जाने को लेकर अधिकारियों ने शुरू की कवायद


ऋषिकेश ,11 मार्च (AKA)।उच्च न्यायालय के आदेश पर धार्मिक मंदिरों की आड़ में किए गए अतिक्रमण को 16 मार्च तक हटाए जाने को लेकर नगर निगम ने तैयारी कर ली  है। जिसे लेकर  निगम अधिकारियों ने  मंदिरों के संचालकों से ही  बातचीत की है । जिसके बाद निगम ने फैसला किया है कि 16 मार्च तक यदि मंदिरों के संचालकों द्वारा स्वयं मूर्तियों व सामान को नहीं हटाया गया तो जेसीबी के माध्यम से अतिक्रमण की जद में आए साईं मंदिर शिव मंदिर वह हनुमान के मंदिर को हटा दिया जाएगा। बुधवार को नगर निगम के मुख्य आयुक्त नरेंद्र सिंह  क्विरियाल ने बताया कि  विगत शनिवार को उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर उप जिलाधिकारी प्रेमलाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। बैठक के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गुप्ता द्वारा ऋषिकेश  क्षेत्र में सरकारी भूमि पर मंदिरो की आड़ में किए गए कब्जों को लेकर तत्काल कार्रवाई किए जाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया था। बैठक में बताया गया, कि ऋषिकेश क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कुल 13 मंदिर बनाए गए हैं। जिसमें पुराना बद्रीनाथ मार्ग पर साईं मंदिर, हरिद्वार मार्ग पर हनुमान मंदिर ,हीरालाल मार्ग, पर शिव मंदिर लक्ष्मण झूला मार्ग पर भैरव मंदिर वीर भद्र मार्ग पर खड़ा महादेव मंदिर ,  होशियारी देवी मंदिर, हरिद्वार मार्ग पर टैक्सी यूनियन के बगल मे शिव मंदिर सहित कुल 13 मंदिरो को पूर्व में ही चयनित किया जा चुका है। इस दौरान मंदिरों के संचालकों के साथ भी अधिकारियों ने बैठक की । जिसमें मंदिरों के संचालकों से बातचीत कर उनके निर्माण संबंधित कागजों की जांच की गई लेकिन कोई भी अधिकृत कागज नहीं दिखा पाया है जिन्होंने प्राधिकरण से नक्शा भी पास नहीं करवाया है। जिन्हें अब 15 मार्च तक का समय दिया गया। कि वह मंदिरों में रखी मूर्तियों के साथ अपना सारा सामान हटा दें अन्यथा 16 मार्च को प्रशासन स्वयं जेसीबी से सभी मंदिरों को हटा देगा नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्विरियाल  का कहना है कि निगम द्वारा राजमार्ग पर स्थित शिव मंदिर तथा साईं मंदिर को हटाए जाने की तैयारी कर ली है भैरव मंदिर तथा हनुमान मंदिर को राष्ट्रीय राजमार्ग  विभाग द्वारा जाएगा। बाकी मंदिरों को मंसूरी देहरादून ऋषिकेश विकास प्राधिकरण द्वारा हटाया जाएगा जिनकी जिम्मेदारियां सुनिश्चित की जा चुकी है क्योंकि 24 मार्च तक न्यायालय को निगम द्वारा की गई अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई की जानकारी दिया जाना है।

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