ऋषिकेश, 3 फरवरी। वैदिक फाउंडेशन हिमालया योगालय आश्रम गंगा वाटिका मैं स्पेन से अपने 3 माह के ऋषिकेश  मुनी की रेती प्रवास में पहुंचने पर स्वामी शंकर तिलक  महाराज का हुआ भव्य स्वागत स्पेन हंगरी ग्रेनादा न्यूजीलैंड ब्राजील जर्मन जापान केरला बेंगलुरू से आए हुए साधको ने भी अपने गुरुदेव स्वामी शंकर तिलक महाराज का पुष्प वर्षा एवं माला पहनाकर गुरुदेव का स्वागत अपनी हिंदू सनातनी सभ्यता के अनुसार वैदिक मंत्रों के द्वारा किया गया आए हुए  विदेशी सभी साधकों ने मंत्रों के द्वारा अपने गुरु का स्वागत किया जहां विदेशी साधक अपने गुरु का स्वागत कर रहे थे वही उत्तराखंड वासियों ने भी शंकर तिलक महाराज का स्वागत किया इस अवसर पर आश्रम के ट्रस्टी पंडित रवि शास्त्री जी ने बताया कि महाराज की यह यात्रा अपने 3 महीने के प्रवास में उत्तराखंड नगरी ऋषिकेश मैं सैकड़ों साधकों को वैदिक फाउंडेशन हिमालय योगालय आश्रम गंगा वाटिका में महाराज श्री के द्वारा आध्यात्मिक एवं योग वेदांत के अंतर्गत यात्रा है इसमें स्वामी शंकर तिलक जी महाराज के द्वारा अपने साधकों को योग एवं आध्यात्मिक एवं वेदांत के बारे में बताया जाएगा महाराज श्री ने बताया कि, योग से मनुष्यों के सभी रोगों का निवारण संभव है, साधकों को योग का महत्व बताते हुए कहा कि ,मनुष्य जीवन में योग जरूरी है ,बीमारी का इलाज खोजने से बेहतर है ,कि शरीर में रोग हो ही ना ,इसके लिए नित्य योग करने की आदत डालनी चाहिए, सोमवार को मुनिकीरेती गंगा वाटिका में योग साधकों को ज्ञान देते हुए ,स्वामी शंकर तिलक ने कहा कि, हमारे पास अनेक ऐसे कारण हैं जो तनाव थकान व चिड़चिडा हट को जन्म देते हैं ,ऐसे में हमारे जीवन को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए योग रामबाण औषधी है, यह हमारे मन मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ एवं निरोग रखता है ,उन्होंने कहा कि योग हमारे भारतीय संस्कृति की प्राचीन पहचान है, ऋग्वेद में कई स्थानों पर योगिक क्रियाओं के विषय में उल्लेख मिलता है ,आज योग कई बीमारियों को दूर करने के लिए लाभदायक साबित हो रहा है मेरी यह यात्रा आध्यात्मिक एवं योग वेदांत को लेकर इसलिए है कि जिससे साधकों को तनाव रहित एवं रोग मुक्त रखा जा सके और वह आध्यात्मिक वातावरण में रहकर अपने को सुरक्षित महसूस करें इस अवसर पर पवित्रा चैतन्य  चैताली चैतन्य बीविन केरला वैगनर ब्राजील लाइस वारी ब्राजील एड्रेनो पंडित रवि शास्त्री अभिषेक शर्मा स्वतंत्रता चैतन्य उमाया चैतन्य आदि लोग उपस्थित थे।

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