ऋषिकेश, जनवरी । नगर क्षेत्र के बिल्डरों ने एमडीडीए पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ऋषिकेश में पर्वतीय क्षेत्रों से जैसी नियमावली को लागू करने की मांग की है। उन्होंने क्षेत्र के विवादित खसरा नंबर छह व अन्य में मानचित्र की स्वीकृति के लिए एनओसी एक सप्ताह के भीतर जारी करवाने की मांग भी की है।
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपे ज्ञापन में बिल्डरों ने बताया कि ऋषिकेश की भौगोलिक स्थिति पर्वतीय क्षेत्रों जैसी है। बताया कि यहां अधिकांश सड़कें तीन से छह मीटर चौड़ी हैं। जबकि एमडीडीए की नियमावली वेल डेवलेप सिटी व मैदानी क्षेत्रों के मुताबिक बनाई गई है। लिहाजा, यह पॉलिसी ऋषिकेश क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती है। मांग करते हुए कहा कि यहां सड़कों की चौड़ाई कम होने के चलते ऋषिकेश में पर्वतीय क्षेत्रों जैसी नियमावली लागू की जाए।
बताया कि खसरा नंबर छह व अन्य 20 साल से विवादित चले आ रहे हैं, जिनमें मनाचित्र स्वीकृति के लिए एसडीएम से एनओसी लेनी पड़ती है, जिसमें सालभर तक का वक्त लग रहा है। इस देरी से निर्माणकर्ताओं को परेशानी पेश आ रही है। बिल्डरों ने यह दावा भी किया कि एमडीडीए शहर में दशहत का माहौल बना रहा है। आरोप लगाया कि प्राधिकरण पूर्व में बनाई गई बिल्डिगों को स्वामियों को नोटिस जारी कर उन्हें सील कर रहा है, जिस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य सरकार की मनाचित्र कंपाउंड योजना की समयावधि तीन माह और बढ़ाए जाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में दिनेश कोठारी, दीपक चुग, मानव जौहर, निशांत मलिक, राजेश व्यास, विशाल कक्कड़, प्रदीप दुबे, नितिन गुप्ता आदि शामिल थे।

Post A Comment: