ऋषिकेश, 1 जनवरी। कथा व्यास उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद  घिल्डियाल को श्रीमद्भागवत रत्न सम्मान से किया गया सम्मानित
    राधा की पीर निर्मल कोई उसे क्या समझे और मेरे प्रीतम बसे पहाड़ पर मैं जमुना के तीर अब तो मिलना कठिन है मेरे पांव पड़ी जंजीर मार्मिक भजनों के साथ व्यास पीठ पर आसीन संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल में राधा कृष्ण विरह वर्णन कर श्रोताओं को भाव विभोर कर झूमने पर मजबूर कर दिया
    शास्त्री नगर काले की ढाल में चल रही कथा के आठवें दिन कथा व्यास ने कहा कि जब मन वचन और कर्म भगवान में समर्पित होते हैं तो उसे प्रेमा भक्ति कहा जाता है जो नौ प्रकार की भक्ति ओं में सर्वश्रेष्ठ है और यही गोपियों को प्राप्त थी इसलिए प्रेम मार्गी गोपियों ने अपनी भक्ति से ज्ञान मार्गी उद्धव को यह बतला दिया कि प्रेम ज्ञान से श्रेष्ठ और कर्मकांड ज्ञान कांड से काफी नीचे की स्थिति है
   भागवत कथा मर्मज्ञ ने कहा कि प्रेम जाति एवं धर्म से ऊपर है इसलिए लोगों में आपसी प्रेम और भाईचारे का श्रेष्ठ संदेश यह भागवत कथा देती है भगवान ने गोपियों और ग्वाल बालों से जाति धर्म पर नहीं अपितु इससे ऊपर उठकर केवल प्रेम किया इसलिए यह कृष्ण कथा पूरे देश को भाईचारे का संदेश देती है कथा स्थल पर भारी भीड़ होने से श्रद्धालु पास पड़ोस के घरों में बैठकर भी कथा का आनंद लेते रहे आज कथा में हिमालय हिंदुस्तान राष्ट्रीय पत्र के संपादक डॉ रवि रस्तोगी शिक्षाविद परमानंद शर्मा था नगरपालिका पार्षद राधा रमोला ने व्यासपीठ पर आसीन उत्तराखंड ज्योतिष आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल को श्रीमद् भागवत रत्न की उपाधि से सम्मान पत्र देते हुए सम्मानित किया
     कथा में आयोजक भास्कर ध्यानी संध्या ध्यानी गौरव ध्यानी अशोक ध्यानी धन्नो देवी रेखा रियाल कुसुम ध्यानी कृष्णा नौटियाल सूर्य प्रकाश गौड़ कृपाराम पोखरियाल आदि उपस्थित थे।

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