ऋषिकेश, 3 जनवरी।सभी धर्मों में राष्ट्र धर्म सर्वोपरि    डॉक्टर घिल्डियाल शास्त्री नगर काले की ढाल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का यज्ञ एवं ब्रह्म भोज के साथ हुआ समापन
  आदि सृष्टि के नायक मनु ने मनुष्य के लिए जिन विभिन्न धर्मों के आचरण का विधान बतलाया भगवान श्री कृष्ण ने संपूर्ण मानव अवतार ग्रहण कर उन सभी धर्मों में से राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि बताया है इसलिए प्रत्येक प्राणी को सर्वप्रथम राष्ट्र के प्रति अपने धर्म का पालन करना चाहिए उपरोक्त विचार उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने शास्त्री नगर काले की ढाल में देवप्रयाग निवासी उत्तराखंड के प्रसिद्ध गोपालक भास्कर आशीष ध्यानी के आवास पर विगत 7 दिवस से चल रही विशाल श्रीमद भागवत कथा के समापन अवसर पर व्यासपीठ से व्यक्त किए कथा व्यास ने कहा कि जब प्रभास क्षेत्र में भगवान कृष्ण का गोकुल वासियों से मिलन हुआ तो पहली बार उनकी दो माता देवकी और यशोदा का भी मिलनवा दोनों ने जब भगवान कृष्ण से पूछा कि तू किसका बेटा है तो भगवान ने यशोदा का हाथ पकड़कर तू है मैया मेरी मैं कन्हैया तेरा मुझको माखन खिला ना तेरा काम है कहकर यह संदेश दिया कि जन्म देने वाली मां से बढ़कर यश देने वाली मां राष्ट्रमाता भारत माता है इसलिए प्रत्येक प्राणी को सर्वप्रथम राष्ट्र के प्रति धर्म निभा कर राष्ट्र का जो कर उस पर है उसे उतारना चाहिए
  श्रीमद्भागवत रत्न से सम्मानित पूरे विश्व में 300 से अधिक श्रीमद् भागवत कथाओं को करने वाले कथा मर्मज्ञ डॉ घिल्डियाल ने कृष्ण सुदामा के मिलन का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा एक मित्र राजा और एक गरीब परंतु दोनों के मिलन के समय भगवान ने आदर्श भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों वसुधैव कुटुंबकम न कोई बड़ा छोटा सभी धर्म एक है का संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को परिवार मानती है जबकि पाश्चात्य संस्कृति पूरे विश्व को बाजार मानती है और परिवार में प्रेम किया जाता है और बाजार में व्यापार किया जाता है वंदे मातरम और भारत माता की जय के उद्घोष के सहित उन्होंने जब जब होई धरम की हानि बाड़े असुर अधम अभिमानी का उदाहरण देकर कहा कि भारत भूमि जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं
  कथा के समापन अवसर पर विशाल यज्ञ तथा ब्रह्म भोज का आयोजन किया गया इस अवसर पर भागवताचार्य को सम्मानित करने के लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ महावीर अग्रवाल भास्कर आशीष ध्यानी पृथ्वीराज ध्यानी संध्या ध्यानी सूर्यप्रकाश कृष्णा कृपाराम पोखरियाल अशोक ध्यानी गौरव सुरेश वीरेश अतुल दीक्षा विधि आदि उपस्थित थे।

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