यशपाल भाटी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष   सैल्यूट तिरंगा जी का ऋषिकेश में भव्यस्वागत व  नरेन्द्र खुराना सोशल मीडिया प्रभारी  सैल्यूट तिरँगा    का जन्मोत्सव  उत्तराखंड प्रदेश व  उपाध्यक्ष   सैल्यूट तिरँगा  शरद तायल पदादिकरियो द्वारा श्री यशपाल भाटी जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,  सैल्यूट तिरंगा  का माला पहनाकर भव्य स्वागत किया, व संग सप्रेम भेट की । भाटी जी के साथ संगठन को कैसे आगे बढ़ाया जाए और क्या कमी है है उन सभी बातो पर चर्चा हुई। साथ ही आज08 दिसम्बर  को  श्री नरेन्द्र खुराना जी, प्रदेश मीडिया प्रभारी, सैल्यूट तिरंगा उत्तराखंड का आज जन्मदिन भी मनाया गया।    वही नरेन्द्र खुराना जी ने इस विषय पर बताया कि वह एक शिक्षक है , तथा उन्हें लिखने का शौक है वही उन्हें आज  गीता जयंती 8 दिसंबर 2019 को है ,व में भाग्यशाली हू ,उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मैने पढ़ी व सुनी  है व कुछ बातों का अध्य्यन किया है जो बता रहा हूँ ! जितना अपने ज्ञानानुसार पता है, हिन्दू पंचांग के अनुसार, मार्गशीष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ही महाभारत काल में कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने धनुर्धारी अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

 श्रीकृष्ण के द्वारा दिए गए गीता के उपदेश हमेशा-हमेशा के लिए प्रासंगिक हैं।
उनके उपदेशों में जीवन को जीने की कला, प्रबंधन, जीवन का मर्म, कर्म आदि सबकुछ हैं।

गीता जयंती  पर हम आपको श्रीकृष्ण के 17 उपदेशों को बता रहे हैं जो इस प्रकार हैं..

1. आत्मा न तो जन्म लेती है और न ही मरती है।  (२.२०)

2. जो अपने मन को नियंत्रित नहीं करते उनका मन ही उनका सबसे बड़ा शत्रु है।  (६.६)

3. हर इंसान को अपने नियत कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है।  (३.८)

4. यदि वास्तविक शांति प्राप्त करनी है तो इच्छाओं से ऊपर उठना पड़ेगा।  (२.७१)

5. वर्ण विभाजन (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र) संबधित कर्म के अनुसार किये गए हैं ।  (४.१३)

6. भगवान पर किसी कर्म का प्रभाव नहीं पड़ता और न ही वो किसी कर्म बंधन में बंधते हैं।  (४.१४)

7. ज्ञान को प्राप्त करने के लिए विनम्रता आवश्यक है।  (४.३४)

8. दुष्ट तथा मुर्ख लोग भगवान की शरण ग्रहण नहीं करते।  (७.१५)

9. प्रकृति निरंतर परिवर्तित होती रहती है। (८.४)

10. अंत समय में जो जिस भाव का स्मरण करता है, वो उसी भाव को प्राप्त होता है ।  (८.६)

11. भगवान को जानने के लिए एकमात्र साधन हैं भक्ति ।  (१८.55)

12. भगवान सबके ह्रदय में विराजमान हैं और उन्ही से ही स्मृति तथा विस्मृति आती है। (१५.१५)

13. जहाँ भगवन हैं वहां ऐश्वर्य, विजय और अलौकिक शक्ति हमेशा रहती है ।  (१८.७८)

14. काम, क्रोध तथा लोभ ये तीन नरक के द्वार हैं ।  (१६.२१)

15. इस संसार में सारे जीव भगवान के ही अंश हैं ।  (१५.७)

16. भगवान समस्त आध्यात्मिक तथा भैतिक जगतों के कारण हैं और उनसे ही प्रत्येक वस्तु उत्पन्न होती है।  (१०.८)

17. जिनकी बुद्धि अनेक शाखाओं में विभाजित रहती है वो अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर पाते।  (२.४१)

भगवद्गीता को ज़ोर से पढ़ने के लाभ:

 1. "9 अध्याय (गीता का आधा भाग) को पढ़ना एक गो-दान करने जैसा है।

 2. गीता का एक तिहाई भाग (6 अध्याय) पढ़ना सोम-यज्ञ करने के लाभ के बराबर है।

 3. तीन अध्यायों को जोर से पढ़ना गंगा में स्नान करने के बराबर है।

 4. यदि आप प्रतिदिन दो अध्याय पढ़ते हैं, तो इससे इंद्रलोक पर एक संपूर्ण कल्प जीने के लिए पर्याप्त पवित्रता मिलेगी।

 5. यदि आप हर दिन एक अध्याय पढ़ते हैं, तो आप पवित्रता अर्जित कर सकते हैं, जो कई वर्षों तक रुद्रलोक पर रहने के लिए पर्याप्त है।

 6. नित्य आधा अध्याय पढ़ने या अध्याय के एक चौथाई पढ़ने पर, आप धर्मनिष्ठा अर्जित कर सकते हैं, जो कई वर्षों तक सूर्यलोक में आनंद लेने की अनुमति देगा।

 7. दस, सात, पाँच, तीन, दो नारे या आधे भी नारों की पुनरावृत्ति, चंद्रलोक पर 10 मिलियन वर्ष जीने की अनुमति देगा।

 8. जो मृत्यु से पहले, भगवद-गीता का पाठ या इसके अर्थ की व्याख्या सुनता है, वह निश्चित रूप से भौतिक बन्धन से मुक्ति प्राप्त करेगा।

 9. यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध  के अनुष्ठान के दौरान भगवद गीता पढ़ता है, तो उसके पूर्वज कभी भी नरक नहीं जाएंगे।

 10. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवद्-गीता को पढ़कर, सर्वोच्च भगवान हरि, श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त  कि जा सकता है। "
इस अवसर पर शरद  तायल ,नरेन्द्र खुराना, मनीष मौर्य, त्यागी जी ,धीरज, दिलीप, उपस्थित रहे !

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