ऋषिकेश, 29 दिसम्बर। शास्त्री नगर काले की ढाल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल में पूरे विश्व के भूगोल का वर्णन करते हुए कहा किस सर्वप्रथम जल मैं अब वातावरण में भगवान विष्णु उत्पन्न हुई उनकी नाभि कमल नाल से ब्रह्माजी उत्पन्न हुए जिन्होंने एक दिव्य सहस्त्र वर्ष तक तप करने के बाद सृष्टि के विस्तार की इच्छा की और पृथ्वी बनाई पृथ्वी में सात लोक मृत्यु लोक से ऊपर  क्रमशः भू लोक भूव लोक परलोक में लोक जन लोक परलोक और सत्यलोक तथा 7   नीचे क्रमशः अतल वितल सुतल तलाताल महाकाल रसातल और पाताल ब्रह्मा जी के भूलने से पृथ्वी रसातल को गई तो उसे उठाने के लिए भगवान विष्णु ने 24 अवतारों में वराह अवतार लिया और हिरण्याक्ष राक्षस का वध किया
    कर्दम ऋषि और  देवहूति विवाह की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने विवाह की प्राचीन परंपराओं का मार्मिक वर्णन किया उन्होंने कहा कि समाज में जब-जब संस्कारों की अवमानना होकर विवाह होते हैं तो वर्णसंकर संतान उत्पन्न होती हैं और उससे महाभारत होता है इसलिए संतान को संस्कारित करना बहुत आवश्यक है देवहूति  कर्दम ने गृहस्थ धर्म में तप करते हुए भगवान के कपिल अवतार को पुत्र रूप में प्राप्त किया जिन्होंने सांख्य दर्शन की स्थापना की आचार्य ने तस्मै नमः कारण सो कर आया मंत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि इस मंत्र से खोई हुई वस्तु  भी प्राप्त हो जाती हैं
  जो करते रहोगे सत्संग धीरे धीरे तो मिल जाएंगे राधारमण धीरे-धीरे तथा तेरा हीरामन तोता उड़ जाएगा और खाली मन पिंजरा उड़ जाएगा मार्मिक भजनों के साथ श्रद्धालु झूम उठे कथा व्यास ने संसार की   नश्वरता का वर्णन करते हुए कहा कि जितना भी जीवन मनुष्य को मिला है उसमें उसे सत्कर्म करने चाहिए उसी से उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है यजमान मंडली में भास्कर आशीष ध्यानी संध्या ध्यानी पृथ्वीराज ध्यानी अतुल ध्यानी डॉक्टर राजेश नौटियाल भारत सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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