ऋषिकेश, 28 दिसंबर। पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त हो सकता है परंतु विवेक की प्राप्ति के लिए सत्संग आवश्यक डॉक्टर घिल्डियाल विद्यालयों एवं शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई लिखाई से पुस्तक विज्ञान एवं अनुभव से अन्य ज्ञान प्राप्त हो सकते हैं परंतु क्या उचित है और क्या अनुचित है यह विचार करने के लिए विवेक की आवश्यकता होती है जो सत्संग से ही प्राप्त हो सकता है
  उक्त विचार उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने शास्त्री नगर काले की ढाल में उत्तराखंड के प्रसिद्ध गोपालक भास्कर आशीष ध्यानी के आवास पर पितरों के मोक्ष एवं राष्ट्रीय कल्याण के लिए आयोजित श्रीमद् भागवत कथा व्यासपीठ से व्यक्त किए उन्होंने कहा कि बिनु सत्संग विवेक न होई गुरु कृपा बिनु सुलभ न सोई बिना विवेका ज्ञान गड़बड़ मचाता है और विवेक की जागृति के लिए सत्संग आवश्यक हो जाता है कथा व्यास ने ज्ञान भक्ति वैराग्य सहित आत्मदेव ब्राह्मण भगवान के 24 अवतारों की कथा सुनाते हुए कहा कि आज देश में कार बहुत हो गई है परंतु संस्कार गायब होते जा रहे हैं इसलिए देश संस्कारों की अवमानना से गुजर रहा है भारत विश्व गुरु था पुनः विश्व गुरु बनने के लिए सत्संग के आयोजन से युवा पीढ़ी को संस्कारित करही देश की संस्कृति की रक्षा की जा सकती है श्रीमद् भागवत कथा का महत्व सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जिस घर में श्रीमद्भागवत की पुस्तक भी आ जाती है वहां 7 पीढ़ियों तक संस्कारों की अवमानना का रोग नहीं लगता है तथा निरंतर वंश वृद्धि होती है
   कथा से पूर्व आईडीपीएल कॉलोनी उग्रसेन नगर आवास विकास गीता नगर मालवीय नगर तथा शास्त्री नगर सोमेश्वर नगर से बड़ी संख्या में कीर्तन मंडली या महिला मंगल दल एवं श्रद्धालुओं ने विशाल शोभायात्रा निकालकर व्यास जी का स्वागत किया शोभा यात्रा में महिलाएं पीले वस्त्र धारण कर सिर पर कलश लेकर चल रही थी परमार्थ संस्कृत महाविद्यालय के आचार्यों ने स्वस्तिवाचन एवं शांति पाठ किया यजमान मंडली में संध्या ध्यानी पृथ्वीराज ध्यानी अशोक ध्यानी सुरेश ध्यानी वीरेश ध्यानी अतुल ध्यानी डॉ राजेश नौटियाल आदि उपस्थित थे।

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