नैनीताल। क्रिसमस की इबादत से लेकर कैरोल गायन की तैयारी के साथ नैनीताल सहित आसपाल के चर्चों में विशेष तैयारी जारी है। हालांकि नैनीताल व आसपास के चर्चों में 27 नवम्बर से क्रिसमस का आगाज हो जाता है इसके तहत 25 दिसम्बर तक आने वाले रविवार को प्रमु यशु के जीन को लेकर ईसाई समुदाय के लोग विविध कार्यक्रम प्रस्तुत करते है। 24 व 25 दिसम्बर को विशेष प्रार्थना सभाएं होती है। चर्चो को विद्युत लडियों से सजाया जाता है। नैनीताल के अलावा भवाली मैथोडिस्ट चर्च, सातताल चर्च व सातताल वाईएमसीए में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।
नैनीताल मैथोडिस्ट चर्च के पादरी फादर के अनुसार चर्च में 24 व 25 दिसम्बर को क्रिसमस मनाने की विशेष तैयारी की जा रही है। इन दो दिनों में कैरोल सिगिंग के साथ ही 25 दिसम्बर की सुबह विशेष प्रार्थना सभा की जायेगी। प्रभु यशु के जीवन पर विविध कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। चर्च को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। इसके अलावा नगर के सबसे पुराने सूखाताल स्थित सेंट जोंस इन विल्डरनैस प्रोस्टेटस चर्च में भी 25 दिसम्बर को विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा माल रोड़ तल्लीताल स्थित सेंटफ्रांसिस कैथेलिक चर्च (लेक चर्च) में भी विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन होगा। 24 दिसम्बर की सांय कैराल सिगिंग के साथ ही 25 दिसम्बर को सुबह 11 बजे से विशेष प्रार्थना सभा होगी। इसके अलावा राजभवन परिसर स्थित सेंट निकोलस चर्च में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किे जायेग। तल्लीताल विशपशां स्कूल स्थित मैथोडिस्ट चैपल में भी कार्यक्रम आयोजित किये जायेगे। इन सभी चर्चों को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। भवाली व सातताल में भी ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस की विशेष तैयारी कर रहे है। मैथोडिस्ट चर्च भवाली के पादरी फादर ने बताया कि सातताल व भवाली चर्च तथा सातताल वाईएमसीए में क्रिसमस के आगमन पर 27 नवम्बर से ही कार्यक्रम शुरू हो जाते है। भवाली चर्च में कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग विंग बनाये गये है। सातसाल वाईएमसीए ने भी कार्यक्रम की जोरदार तैयारी कर रखी है। भवाली चर्च में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सांयकाल को विशेष प्रार्थना सभा होगी। 25 दिसम्बर को सुबह 11 बजे विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन होगा। इस दौरान सामुहिक बाईबिल पाठ भी किया जायेगा। परम्परा अनुसार यहां सभी धर्म के लोगों व शहर के गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया जायेगा। विशेष प्रार्थना सभा के बाद बच्र्चों को उपहार वितरित किये जायेंगे। इसके बाद सूक्ष्म दावत का दौर चलेगा।
 अंग्रेजों द्वारा बसाये गये इस शहर में क्रिसमस मनाने का उद्देश्य डू गुड एंड वी गुड है। यानि यहां गरीबों दावत देने की परम्परा आज भी जारी है। यहां अंग्रेजों द्वारा स्थापित पब्लिक स्कूलों में अवकाश से पूर्व व क्रिसमस आने से पूर्व कूड़ा बीनने वालों, रिक्शा व नाव चालकों तथा स्कूलों के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को दावत दी जाती है। आटा-चावल, कम्बल व कपड़े बांटे जाते है। सेंट मेरी कालेज में इसे आज भी भव्य रूप दिया जाता है।

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