अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में कटे होंठ व तालु विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय  कार्यशाला बुधवार को विधिवत संपन्न हो गई। बीते दो नवंबर से आयोजित कार्यशाला में देश-  विदेश से आए प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञों ने जन्मजात कटे होंठ व तालू से ग्रस्त 22 मरीजों की बिना शुल्क सफल सर्जरी की। कार्यशाला के लिए कुल 40 मरीजों का चयन किया गया था, चिह्नित अवशेष 18 मरीजों की सर्जरी जल्द की जाएगी।                                                                                                एम्स ऋषिकेश में निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में संस्थान के सहयोग से मिशन स्माइल व स्माइल एशिया संस्था के तत्वावधान में बीते दो नवंबर को जन्म से कटे होंठ व तालू से ग्रस्त मरीजों की अंतरराष्ट्रीय  कार्यशाला शुरू हुई,जिसके तहत स्क्रि​निंग के बाद चार से छह नवंबर तक मरीजों के आपरेशन किए गए।                                                                                                                                                                                                                                                                      एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने कार्यशाला के सफल आयोजन व मरीजों की निशुल्क सर्जरी के लिए सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार जताया। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया पहाड़ों में माताओं में फोलिक एसिड की कमी से ऐसे बच्चों का जन्म होता है, लिहाजा इस तरह के बढ़ते मरीजों को लेकर अनुसंधान की जरुरत है। जिससे जन्मजात विकृतियों की रोकथाम की जा सके और स्वस्थ बच्चे जन्म ले सकें।                           एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान में 2016 से प्लास्टिक चिकित्सा विभाग जन्मजात कटे होंठ व तालू से ग्रस्त मरीजों की सर्जरी कर रहा है, जिससे अब तक 92 मरीज लाभान्वित हो चुके हैं।                                                                                                                                                                                                                                            आयोजित कार्यशाला में ऋषिकेश और आसपास के मरीजों के साथ ही हरिद्वार, सहारनपुर, उधमसिंहनगर, रुड़की, सुल्तानपुर आदि इलाकों से कटे होंठ व तालू से ग्रसित 40 मरीजों ने हिस्सा लिया। जिनमें से चिह्नित 22 मरीजों की स्क्रिनिंग के बाद सफलतापूर्वक सर्जरी कर दी गई। संस्थान के प्लास्टिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डा. विशाल मागो ने बताया ​कि कार्यशाला में कुल 40 मरीजों को सर्जरी के लिए चयनित किया गया था,जिनमें से तीन दिवसीय कार्यशाला में 22 मरीजों के ऑपरेशन किए गए। बताया कि अवशेष 18 मरीजों की निर्धारित उम्र से कम होने, पौष्टिक आहार की कमी, वजन कम होने आदि कारणों से सर्जरी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को आवश्यक परामर्श दिया गया है,इसके बाद मानक पर खरा उतरने पर उनकी सर्जरी भी कर दी जाएगी।                                                                                                                                                   कार्यशाला में मिशन स्माइल के निदेशक डा. रामकुमार, मास्को के डा. टिकोन, कोलकाता की प्लास्टिक सर्जन डा. अपर्णा,एम्स एनेस्थिसिया विभाग के डा. संजय अग्रवाल, डा. तरुण मित्तल, डा. जूही, डा. देवरति चटोपाध्याय, डा. मधुवरी वाथुल्या,डा. अल्ताफ,डा. अक्षय आदि ने सहयोग किया।

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