एम्स ऋषिकेश में अस्थि रोग विभाग की ओर से सेरिब्रल पालसी नामक बीमारी विषय पर राज्यस्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसमें देश व विदेश के चिकित्सकों ने इस बीमारी के कारण व बचाव के बारे में व्याख्यानमाला प्रस्तुत की। संगोष्ठी में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि एम्स में सेरिब्रल पालिसी से पीड़ित बच्चाें की चाल को अत्याधुनिक तकनीकियों से समझने व उपचार में मदद के लिए विश्वस्तरीय गेट लैब का संचालन किया जा रहा है। यह सुविधा देशभर में गिने चुने मेडिकल संस्थानों में ही उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि बच्चों से जुड़ी सभी अस्थि संबंधी बीमारियों के लिए एमसीएच प्रोग्राम देशभर में सिर्फ ऋषिकेश एम्स में संचालित किया जा रहा है।                                                                                                     शनिवार को संस्थान के अस्थि रोग विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी का बतौर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने ​विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि बच्चों की अस्थि संबंधी जटिल बीमारियों का सही उपचार बड़े अस्पतालों में ही संभव है, लिहाजा एम्स ऋषिकेश इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहा है। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने कहा कि संस्थान इस दिशा में सततरूप से कार्य करेगा और इसे आगे बढ़ाया जाएगा।                                                                                                                                                                                                                                                उन्होंने बताया कि संस्थान के अस्थि रोग विभाग में सेरिब्रल पालसी बच्चों में चाल संबंधी बीमारी के उपचार के लिए करीब सालभर से स्पेशल क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है,जिसमें इस जटिल बीमारी से ग्रस्त मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से रोगी इलाज के लिए आ रहे हैं। निदेशक एम्स ने बताया कि इस मर्ज का समग्र इलाज अलग अलग विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जाता है।  निदेशक प्रो. रवि कांत ने ऐसी बीमारी से पीड़ित बच्चों के अभिभावकों से उनका उपचार एम्स में कराने की अपील की।                                                                 संगोष्ठी में अमेरिका के विश्वविख्यात चिकित्सक फ्रीमैन मिलर ने सेरिब्रल पालिसी नामक बीमारी के उपचार की विभिन्न प्रणालियों व इससे जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि इस रोग के उपचार में चिकित्सक के साथ साथ मरीज के परिवार व समाज की भी अहम भूमिका होती है। डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने इस बीमारी पर शोध कार्य की जरुरत बताई, जिससे अधिकाधिक रोगियों को इससे निजात मिल सके।                       संगोष्ठी में अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डा. पंकज कंडवाल, प्रो. शोभा एस. अरोड़ा, संगोष्ठी के संयोजक डा. विवेक सिंह,डा.निशांत गोयल आदि ने अपने अनुभव साझा किए।                                                                                                                                                                                            इस अवसर पर एमएस डा.ब्रह्मप्रकाश, प्रो. कमर आजम, डा. राजलक्ष्मी अय्यर,डा. राजकुमार यादव, डा. तरुण गोयल. आरबी कालिया,डा. मोहित ढींगरा,डा. भास्कर सरकार,डा. ओसामा नियाज आदि मौजूद थे।

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