ऋषिकेश, 25 नवंबर। आज संतो  को आवंटित और कुटिया से निकाले गए संतो व दूसरे प्रकरणों, विवादों से घिरी स्वर्ग आश्रम प्रबंधन का इतिहास अपने आप में अनोखा रहा। स्वर्गश्रम ट्रस्ट के संस्थापक
डालमीया थे और स्वामी आत्मप्रकाश ने  स्वामी विशुद्धानन्द सरस्वती जी बाबा काली कमली वाले से दिक्षा ले कर डालमिया को अपना अनुयायी बनाया और सन् 1931-32 मे स्वर्गश्रम ट्रस्ट बनाया जिसमे डालमीया ने  धनशयाम दास  को भी ट्रस्टी बनाया ट्रस्ट द्वारा ऋषिकेश के गंगा पार जिला पौडी गढवाल मे जोक पट्टी ग्राम मे भूमी लेकर साधु संतो के भजन करने के लिए कुटीयँये और भोजन की व्यव्सथा तथा दुध ,कम्बल ,सभी व्यवस्था अछी थी। जो की पुराने समय के लोग मर गये ,और अब ट्रस्ट के ट्रस्टी नोकरो पर जिम्मेदारी  देकर शान्ति से बैठे है और नोकर मन मानी कर रहे है ।
साधु संतों की सेवा करने की वजह जिस प्रकार रावण साधु सन्तो का रक्त कर के रुप मे निकालता था ठीक उसी तरहा ट्रस्ट के नोकर साधु संतों से कर ले रहे है ,कुटीया मे रह रहे सन्त भह के साये मे है। प्रबन्धक आये दिन सन्तो को धमका कर कागजो पर  हताक्षर करता है और उसमे लिखता है की साधु सन्त प्रबन्धक के कार्य से खुश है,बिरला जी  का नाम विश्वभर मे धर्मात्माओ मे दर्ज है। उन की छवी को धुमिल करने वाले  स्वर्गश्रम ट्रस्ट के कारिन्दा प्रबन्धक वा कुछ चाटुकार आदी ।
जल्द ही होगे षड् दर्शन साधु समाज अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षा समिती की बैठक कलकत्त मे बिरला परिवार से और नही माने तो कोर्ट मे किया जायेगा दावा ट्रस्ट के विरूद्ध अनुशासन हिन्ता का महन्त गोपाल गिरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष षड् दर्शन साधु समाज अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षा समिती ।

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