अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में सीएलएसआई वर्कशॉप ऑफ एंटी माइक्राेब्रियल सेसेब्टेबिलिटी टे​स्टिंग एंड क्लिनिकल वैक्टिरियोलॉजी रिपोर्टिंग का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से जुटे प्रतिभागियों को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने माइक्रोबायोलॉजी लैब में एंटीबायोटिक रिपोर्टिंग के तौर तरीके बताए।                                                                                                                                                                                                                                                            मंगलवार को एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने माइक्रोबायोलॉजी, इन्फेक्शन कंट्रोल प्रैक्टिस आदि विषयों को एमबीबीएस के यूजी-पीजी पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया,जिससे भविष्य में अच्छे चिकित्सक तैयार किए जा सकें। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से इस महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन पर प्रसन्नता जताई व विभाग की प्रशंसा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस श्रंखला में माइ्क्रोबायोलॉजी, इन्फेक्शन कंट्रोल प्रैक्टिस आदि विषयों पर इस तरह के आयोजन आगे भी सततरूप से किए जाएंगे, जिससे लोगों को इस विषय पर जागरुक किया जा सके।                                     विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ की नवंबर-2019 माह की थीम एंटीबायो​टिक रेजिस्टेंस विषय पर आधारित कार्यशाला में पीजीआई चंडीगढ़ के डा. पल्लब रे,जिपमर पांडिचेरी के डा. अपूर्व शंकर शास्त्री, जेएसएस मेडिकल कॉलेज मैसूर की डा. दीपाश्री आर. ने व्याख्यान दिया। उन्होंने देशभर से कार्यशाला में जुटे प्रतिभागियों को माइक्रोबायोलॉजी लैब में एंटीबायोटिक रिपोर्टिंग के गुर सिखाए, जिससे पेसेंट को सही रिपोर्ट दी जा सके व उसे सही एंटीबायोटिक लेने का उचित परामर्श दिया जा सके।                                                                                                                आयोजन समिति की अध्यक्ष व माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. प्रतिमा गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला में विशेषज्ञों ने उत्तराखंड परिक्षेत्र में प्रयोगशालाओं की रिपोर्टिंग में सुुधार पर जोर दिया। बताया कि इसका उद्देश्य उत्तराखंड क्षेत्र में संचालित क्लिकल माइक्रोबायोलॉजी की प्रयोगशालाओं का नेटवर्क स्थापित कर उनके प्रतिनिधियों को अंतरराष्ट्रीय गाइड लाइन के तहत एंटीबायोटिक की टे​स्टिंग व रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाना है, जिससे आने वाले समय में वह मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कार्य कर सकें।                                                                                                                                                                                                       आयोजन समिति के सचिव डा. मोहित भाटिया ने बताया कि विभाग की ओर से सही एंटीबायोटिक प्रिस्क्रिप्शन प्रैक्टिसेस विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा,जिससे मरीजों को मर्ज के लिहाज से उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए सही दवा उपलब्ध कराई जा सके। कार्यशाला में मुख्यअतिथि डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, विशिष्ठ अतिथि मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. ब्रह्मप्रकाश, डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर डा. सौरभ वार्ष्णेय ने भी व्याख्यान दिया।                                                                                                                                                                                                                   कार्यशाला में उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, हरियाणा, जम्मू, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान, मध्यप्रदेश, कलकत्ता, तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों के 90 प्रतिभागी भी शामिल हुए। इस अवसर पर प्रो. शैलेंद्र कुमार हांडू, डा. अनुभा अग्रवाल,डा. नीलम कायस्था,डा. बलराम जीओमर, डा. याेगेंद्र प्रताप माथुरिया, डा. पुनीत कुमार गुप्ता, डा. हिमांशु नरूला, डा. अरूप मोहंती आदि मौजूद थे।

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