( आज का आदित्य) अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व अनमोल परंपराओं के कारण सदियों से उत्तराखंड की देवभूमि देश,दुनिया में एक अलग ही पहचान रखती है। उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बचाने-सहेजने के प्रयास आज उत्तराखंड की तमाम संस्थाएं निरंतर कार्यरत है। यही वजह भी हैं की आज के समय में उत्तराखंड की लोक-संस्कृति विश्व सांस्कृति मंच पर अपनी अलग पहचान ही नहीं बना रही है अपितु दुनिया के तममा लोक-सांस्कृतिक परिवेशों में अपना परचम भी लहरा रही है।
इसी कड़ी मैं  उत्तराखंड की लोक संस्कृति व लोक संगीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सामाजिक संस्था ‘उत्तराखंड महासंघ’ के तत्वावधान में आगामी 17 नवम्बर को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ‘मण्डाण 2019’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसमें उत्तराखंड सहित देश-विदेश से कई प्रबुद्धजन पहुंच रहे है।
दक्षिण भारत में पहली बार लग रहे इस उत्तराखंडी मंडाण में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में सिरकत करेंगे तो ‘ द हंस फाउंडेशन’ के प्रेरणास्रोत एवं समाजसेवी माताश्री मंगला जी एवं श्रीभोले जी महाराज इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति देंगे।
बैंगलोर मैं आयोजित होने मंडाण कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए माताश्री मंगला जी ने कहां कि उत्तराखंड की संस्कृति जितनी समृद्ध है, उतने ही मन को मोहने वाले यहां के लोकगीत-नृत्य भी हैं। यहां लोक की विरासत समुद्र की भांति है, जो अपने आप में विभिन्न रंग और रत्न समेटे हुए है। उत्तराखंडी लोक-जीवन अलग ही सुर-ताल लिए हुए है, जिसकी छाप यहां के लोकगीत-नृत्यों में भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। उत्तराखंडी लोकगीत-नृत्य महज मनोरंजन का ही जरिया नहीं हैं, बल्कि वह लोक-जीवन के अच्छे-बुरे अनुभवों से सीख लेने की प्रेरणा भी देते हैं। इन लोक गीतों-नृत्यों को संजोने के लिए आज हमारी तमाम सामाजिक संस्थाएं और लोक गायक-कलाकार निरंतर प्रयास कर रहे है। इसी कड़ी में दक्षिण भारत में पहली बार ‘उत्तराखंड महासंघ’ द्वारा आयोजित किया जा रहा,उत्तराखंडी मंडाण महत्वपूर्ण आयोजन हैं। इसके लिए हम उत्तराखंड महासंघ के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई देते है। साथ ही हम दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं नई पहल नई सोच के संस्थापक संजय दरमोडा जी को भी बधाई देते हैं कि उनके सानिद्ध में इस भव्य मंडाण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
नई पहल नई सोच के संस्थापक एवं समाजसेवी संजय दरमोड़ा ने कार्यक्रम आयोजन के बारे में बताया की दक्षिण भारत की धरती पर उत्तराखंडी लोक संस्कृति का परचम लहराने की दिशा में यह प्रयास उत्तराखंड महासंघ द्वार बहुत ही महत्वपूर्ण प्रयास है। यह अब इस लिए भी महत्वपूर्ण हो गया हैं कि इस भव्य आयोजन में हमें पूज्य माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी का आशीष मिल रहा है। जो देश भर में स्वास्थ्य-शिक्षा से लेकर उत्तराखंड के सांस्कृति संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। हम इस आयोजन में आने के लिए अपनी सहमती देने के लिए उत्तराखंड महासंघ बैंगलोर की तरफ से पूज्य माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी का कोटि-कोटि आभार व्यक्त करते है।
आपको बता दें कि 17 नवंबर को बैंगलोर में आयोजित होने वाले इस उत्तराखंडी मंडाण कार्यक्रम में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी सहित समाज-संस्कृति की कई हस्तियां “मण्डाण” कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी।

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