ऋषिकेश ,12 नवंबर  (AKA)।बैकुंठ चतुर्दशी पर लाखों की संख्या में त्रिवेणी घाट पर पहुंचे, श्रद्धालुओं ने 365 ज्योत जलाकर विश्व शांति के साथ परिवार में सुख समृद्धि की कामना कामना की । पंडित वेद प्रकाश शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है ।इस दिन पूजा निशित काल मध्य रात्रि में की जाती है ।इस दिन भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा का विधान है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है ।उन्होंने कहा कि इस दिन पूरे विधि विधान से पूजा करने पर बैकुंठधाम यानी स्वर्ग की प्राप्ति होती है ।पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत में मारे गए लोगों का भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्राद्ध भी करवाया था ।इसलिए इस दिन दान  कार्य करने का भी विशेष महत्व है ।उन्होंने यह भी बताया कि भगवान विष्णु तथा शंकर भगवान की पूजा की जाती है ।इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए, पूजा में  गाय का दूध व सूखे मेवे से पूजा करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। सुख समृद्धि और इससे आरोग्य की प्राप्ति भी होती है। वैकुंठ चतुर्दशी पर शंकर भगवान भी खुश होते है। शास्त्री के अनुसार पौराणिक कथाएं हैं कि एक बार भगवान विष्णु देव  तथा महादेव ने एक साथ  पूजन  कर्णिका घाट पर  1000 स्वर्ण कमल पुष्पों से भगवान विश्वनाथ के पूजन करने का संकल्प लिया । अभिषेक के बाद जब यह पूजन करने लगे, तो शिव जी ने उनकी भक्ति की अपेक्षा के उद्देश्य एक कमल पुष्प कम कर दिया , जिसकी पूर्ति के लिए भगवान विष्णु अपनी आंख के लिए स्वयं प्रकट हुए विशाल भक्ति से प्रसन्न होकर देवाधिदेव महादेव प्रकट होकर बोले हे विष्णु संसार में दूसरा कोई नहीं है। इसलिए आज के दिन 365 जोत जलाए जाने का महत्व बताया गया है इसी के चलते त्रिवेणी घाट पर मंगलवार की देर शाम  लाखों  लोगों ने ज्योत जलाई ।

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