ऋषिकेश, 16 अक्टूबर। महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम हिमालय पुत्र श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता श्री अनिल कपूर जी, अभिनेत्री दीया मिर्जा, श्री विवेक ओबेराय, श्री कैलाश खेर और अन्य विशिष्ट अतिथियों के पावन सान्निध्य एवं गरिमामय उपस्थिति में आज मायानगरी मुम्बई में ’कम होम टू योर सेल्फ’ पुस्तक का विमोचन हुआ।
राजभवन मालाबार हिल्स मुम्बई में डिवाईन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी द्वारा परमार्थ निकेतन माँ गंगा के तट पर दिये गये उद्बोधनों को संकलित कर प्रतिष्ठित प्रकाशक पेंग्विन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ’’कम होम टू योर सेल्फ’’ पुस्तक का दिव्यता और भव्यता के साथ विमोचन हुआ।
आज विशिष्ट अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति में राजभवन मुम्बई में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तत्पश्चात प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी और श्रीमती रूना शिवमणि जी के दिव्य संगीत के साथ कम होम टू योर सेल्फ का विमोचन हुआ। उनके संगीत ने सभी को रोमांचित कर दिया वास्तव में यह पल अविस्मरणीय था।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने महामहिम राज्यपाल श्री भगतसिंह कोश्यारी जी और सभी विशिष्ट अतिथियों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
ज्ञात हो कि विगत माह इस पुस्तक की प्रथम प्रति भारत के राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंद जी को भेंट की गयी थी। दिल्ली में विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरू परम पावन दलाई लामा जी, संत मोरारी बापू जी, योग गुरू रामदेव जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, पूर्व प्रमुख जत्थेदार, अमृतसर, ज्ञानी गुरबचन सिंह जी, ज़मीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव, मौलाना महमूद मदनी, लामा श्री चेतसंग रिन्पोचे, फादर अजीत पैट्रिक जी, अध्यक्ष उलेमा फाउंडेशन आॅफ इंडिया शिया मौलाना कोकब मुस्तबा जी, हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष डाॅ शंकर सान्याल जी, की पावन उपस्थिति में ’’कम होम टू योर सेल्फ’’ पुस्तक का विमोचन किया गया था तब ऐसा लग रहा था कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं है बल्कि भारत की संस्कृति का विमोचन है।
साध्वी भगवती सरस्वती ने ’कम होम टू योर सेल्फ’ पुस्तक में जीवन की समस्याओं का सहज समाधान सुझाया गया है।
महामहिम श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने कहा कि कम होम टू योर सेल्फ एक मार्गदर्शक है; एक तत्व है। भारत के पास आध्यात्मिकता है और उस आध्यात्मिकता की ओर आज सारी दुनिया है क्योकि भारत में पास शान्ति है; सन्तुष्टि है। उन्होने कहा कि आज श्रेष्ठ साहित्य और चितंन कम पढ़ने को मिलता है परन्तु भारतीय साहित्य में सपूर्णता है। साध्वी भगवती जी ने स्वयं का जीवन आदर्श बना लिया है ऐसा व्यक्तित्व ही दूसरों का जीवन आदर्श बना सकता है।

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