ऋषिकेश। भाई दूज का पावन त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इस दिन बहनें शुभ मुहूर्त में भाइयों का तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। उत्तराखंड के हर हिस्से में ये पर्व धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों की आरती उतार तिलक किया और फिर उन्हें नारियल दिया। वहीं, बहनों को भी उपहार मिलें। भाइयों के तिलक का शुभ मुहूर्त शाम तीन बजकर 36 मिनट तक रहा।
इस पावन पर्व पर हर साल बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके हाथ पर कलावा बांधती है। साथ ही यम देवता से अपने भाई की लंबी उम्र के लिए कामना करती है। साल भर बहनों को जिस पावन पर्व का इंतजार रहता है आज वह पर्व आया था। इस पर्व के लिए दो-तीन दिन पहले से ही भाई बहनों ने तैयारी करनी शुरू कर दी थी। बहनों ने पूजा के लिए ड्राईफ्रूट, मिठाई और सूखे नारियल के गोले की खरीददारी कर दी थी। वहीं, भाइयों ने भी अपनी बहनों को सरप्राइज देने के लिए गिफ्ट आइटम, मोबाइल आदि खरीदना शुरू कर दिया था। मान्यताओं के अनुसार भाई दूज का त्योहार मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। यमराज हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर आते हैं। वह उनकों तिलक लगाकर भोजन करवाती है। यमुना ने यमराज से वरदान मांगा था कि वह हर वर्ष इस तिथि को अपनी बहन के घर आएंगे। इसी तरह जो भाई इस तिथि को अपनी बहन के घर जाएगा, तिलक लगवाएगा और भोजन करेगा। उसको कोई डर नहीं रहेगा। यमराज ने अपनी बहन को वरदान दिया था। तब से हर वर्ष भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है।

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