ऋषिकेश, 26 अक्टूबर।  नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को छोटी दीपावली पर्व को गढ़वाल के प्रमुख त्यौहार बग्वाल के रूप में मनाया गया।शहर से सटे तमाम ग्रामीण क्षेत्रो में सुबह से ही बग्वाल पर्व की तैयारियां शुरू हो गयी थी।ग्रामीणों द्वारा अपने घरों में अपने मवेशियों (गायों)को नहलाकर पूजा अर्चना कर उनको मंडुवे एवं चावल से बनें पकवान (बाड़ी)का भोग लगाया गया।साथ ही गाय माता की सींगों में सरसों का तेल लगाकर फूलमाला डालकर उनको सजाया गया।गढ़वाल महासभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ राजे नेगी ने बताया कि पहाड़ में छोटी दिवाली को बग्वाल पर्व के रूप में एवं दिवाली के ठीक ग्यारह दिन बाद इगास बग्वाल के रूप में मनाया जाता है,डॉ नेगी ने बताया कि बग्वाल के दिन रक्षाबंधन पर हाथ पर बंधे रक्षासूत्र को बछड़ी के पूंछ पर बांधकर मन्नत पूरी होने के लिए आश्रीवाद मांगा जाता है।पहाड़ में बग्वाल एवं गोवर्धन पूजा दोनों ही दिन गौमाता की पूजा कर उनको पूरी, स्वाले,चावल एवं मंडवे से बने पकवानों का भोग लगाकर उनका आश्रीवाद लिया जाता है।इस पावन मोके पर घरों के आंगन को गोबर से लीपकर उसमे रंगोली बनाकर दियो से सजाया जाता है। साथ ही शाम के समय ढोल दमाऊ की थाप के साथ चील की छाल से बने भेळो जलाकर भेळो बग्वाल के रूप में इस त्यौहार को आज भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।डॉ नेगी ने सभी लोगो से प्रदूषण मुक्त इकोफ्रेंडली दीपावली मनाने एवं एक दिया मातृभूमि के लिए शहीद हुवे अमर वीर जवानों की याद में जलाए जाने की अपील की।

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