ऋषिकेश, 13 अक्टूबर। खीर बन जाती है अमृत विज्ञान भी करता है इसकी पुष्टि
  मानव भले ही आज के युग में चांद पर पहुंच गया हो परंतु ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से चंद्रमा मन का कारक माना गया है चंद्रमा की कलाओं के घटने बढ़ने का प्रभाव प्रत्येक प्राणी की मन है स्थिति पर पड़ता है जो सबसे ज्यादा तरंगित होती है शरद पूर्णिमा के दिन और उस शरद पूर्णिमा की अमृत वर्षा की रात आज होगी
  राजकीय आदर्श इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल के संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि आज की इस पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं के साथ आकाश में होता है यह कलाएं आज हैं क्रमशः अमृत मंदा पुष्प पुष्टि   तुष्टि धृति सासनी चंद्रिका कांति जोशना श्री प्रीति विमला अंगदा पूर्ण और पूर्ण अमृत वर्षा ऋतु की जरा अवस्था और शरद ऋतु के बाल रूप के संधिकाल के शरद का चंद्रमा अपनी इन कलाओं के सौंदर्य से सहज ही मन को मोह लेता है पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के अंदर चंद्रमा की सोलह कलाएं मौजूद थी इसी रात्रि को उन्होंने महाराज किया था और उनकी इन कलाओं से गोपियां  निर्विघ्नं उनकी की ओर खींची चली आई थी साथ ही यह भी मान्यता है कि महालक्ष्मी और महर्षि वाल्मीकि का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था तथा भगवान शिव और माता पार्वती के जेष्ठ पुत्र कार्तिकेय का अवतरण भी इसी दिन हुआ था नारद पुराण के अनुसार शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में लक्ष्मी पृथ्वी का आनंद उठाने भ्रमण के लिए निकलती है इस दिन अमृतवेला में जो मनुष्य उनकी आराधना करता है उस पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है इसलिए इस व्रत को  को जागर अर्थात कौन जाग रहा है भी कहा जाता है बंगाल और उत्तर भारत में यह उत्सव शरद पूर्णिमा के रूप में तथा दक्षिण भारत में ग्वार की पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है इस दिन ही गज लक्ष्मी की पूजा भी होती है
    इस रात्रि का वैज्ञानिक महत्व
   मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिष वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मानित डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि इस दिन गाय के दूध से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में छत पर रख देने से दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड चंद्रमा की किरणों का अमृत तत्व लेकर शक्ति दायक होता है चावल में    शुगर होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है तथा अमृत रूपी यह खीर श्वास रोगियों के लिए दवा का काम करती है इस खीर के सेवन करने से मौसम बदलने पर फैलने वाले रोगों से मुक्ति मिलती है आयुर्वेद में शरद पूर्णिमा की रात्रि को वैद्य द्वारा विभिन्न जड़ी बूटियों से औषधियां बनाई जाती हैं क्योंकि यह माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के चंद्रमा की किरणें अनाज एवं वनस्पतियों में औषधीय गुण दे देती है ज्योतिष रत्न डॉ घिल्डियाल ने बताया कि आज ही व्रत स्नान एवं दान की पूर्णमासी भी है इसलिए इसका महत्व कई गुना अधिक बढ़ गया है।

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