ऋषिकेश 17 अक्टूबर सन 2010 में शिवानंद आश्रम के स्वामी चिदानंद  के शिष्य स्वामी दुर्गानंद सरस्वती ने स्वर्ग आश्रम प्रबंधन से अपने योग साधना भजन और रहने के लिए उस समय के स्वर्ग आश्रम के प्रबंधक सीपी शर्मा से रहने के लिए अनुमति ली । स्वर्ग आश्रम प्रबंधन के द्वारा की जाने वाली कागजी कार्रवाई की सभी शर्तें भी उन्होंने पूरी की स्वर्ग आश्रम प्रबंधन ने स्वामी दुर्गानंद को गंगा तट पर भूमि भी उपलब्ध करवाई स्वामी दुर्गानंद ने उस भूमि पर स्वर्ग आश्रम के ठेकेदार हरि सिंह से चार लाख में अपने रहने के लिए कमरा बनवाया जिसमें किचन, रहने गेस्ट, आवास, और शौचालय आदि का निर्माण करवा स्वामी दुर्गानंद के द्वारा चार लाख की धनराशि खर्च करने के बावजूद वर्तमान स्वर्ग आश्रम के प्रबंधक ने फरवरी 2019 में स्वामी दुर्गानंद को इनकी कुटिया से बाहर निकाल दिया उधर स्वर्ग आश्रम के वर्तमान प्रबंधक आर्मी से रिटायर कर्नल वी के के श्रीवास्तव का कहना है कि सबसे पहले स्वामी जी के शिष्य पर स्वर्ग आश्रम के एक महिला कर्मचारी से अभद्रता करने की शिकायत आई उसके बाद स्वामी दुर्गानंद के कुटिया के आसपास रहने वाले कुछ एक संतों ने  इनके खिलाफ लिखित शिकायत दी । उसके बाद स्वर्ग आश्रम प्रबंधन ने यह कार्रवाई की
 वही इसी विषय में स्वामी दुर्गानंद का कहना है कि मैं कुंभ स्नान के लिए इलाहाबाद मेले और उसके बाद छत्तीसगढ़ तीर्थ में चला गया था । इसी बीच में अपने शिष्य ब्रह्मचारी लक्ष्मण चैतन्य को स्वर्ग आश्रम प्रबंधन से अनुमति लेकर ही दो माह के लिए अपनी कुटिया की सुरक्षा के लिए रख कर गया था। इसी बीच शिष्य पर छेड़छाड़ के आरोप लग गए जिसमें स्वर्ग आश्रम प्रबंधन ने मुझे दोषी मानते हुए अपने दस पन्द्रह आदमियों के साथ मिलकर कुटिया से मेरा सामान बाहर निकाल दिया और मुझ पर जबरन दबाव बनाकर एक कागज पर जबरन लिखवा लिया गया कि मैं कुटिया अपनी स्वेच्छा से छोड़कर जा रहा हूं । इसके बाद स्वामी ने प्रधानमंत्री कार्यालय में इस संबंध में शिकायत भी की जिस पर 13 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव उत्तराखंड को पत्र भेजा था । वही इसी विषय पर लक्ष्मण झूला थाना अध्यक्ष राकेन्दर सिंह का कहना है कि मैं तीन बार स्वर्ग आश्रम के प्रबंधन से मिला पर स्वर्ग आश्रम प्रबंधन ने इसको अपना निजी मामला बताया वहीं उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने भी उनके मामले को संज्ञान में ले लिया अब देखना है कि केंद्र में प्रधानमंत्री कार्यालय और राज्य का मानवाधिकार आयोग स्वामी दुर्गानंद को कब तक उसकी आश्रय दिलाता है। इस मामले की खबर की सच्चाई जानने के लिए हमने कई संतों से बातचीत की उन सभी संतों ने माना कि उन्होंने अपनी कुटिया का निर्माण स्वयं के खर्चे से खुद करवाया जिसमें हमें स्वर्ग आश्रम ट्रस्ट से कोई मदद नहीं मिली वही स्वर्ग आश्रम प्रबंधन का कहना है कि कुटिया का निर्माण हम करवा कर देते हैं। स्वर्ग आश्रम प्रबंधन की हमसे कुटिया निर्माण करवाने की बात इसलिए कमतर साबित हुई कि स्वर्ग आश्रम की एक कुटिया आज भी  जीर्णशीर्ण  व बदहाल स्थिति में है। जिसे बनाने के लिए वहां पर रहने वाले संत के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। वह इसी बदहाल कुटिया में रहने को मजबूर है इनकी ऐसी बातों पर प्रबंधन पर कुटिया निर्माण में वित्तीय अनियमितता की बातें भी सामने आ रही है कि जिन कुटिया का निर्माण संतों ने अपने पैसों से किया था उसका बजट भी प्रबंधन ने ट्रस्ट के खातों से ना निकाल लिया हो।  वही सुनने में यह भी आ रहा है कि स्वर्ग आश्रम प्रबंधन अधिकतम संपन्न संतो को ही कुटिया आवंटित करता आया है। किसी संत को बनी बनाई कुटिया के एवज में प्रबंधन पर लाभ लेने के आरोप लग रहे हैं इसके अलावा प्रबंधन पर 30 वर्ष के युवाओं को कुटिया देने का आरोप भी लगा है जबकि इसमें उम्रदराज संतों को भी योग साधना भजन आदि करने के लिए कुटिया देने का प्रावधान है विश्व भर में स्वर्ग आश्रम ट्रस्ट का बहुत बड़ा नाम है पर जौक  प्रबंधन अपने ऐसे कृत्यों से ट्रस्ट की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। एक 80 वर्षीय संत पर अनर्गल आरोप लगाकर उसको उसी की बनाई कुटिया से बाहर निकालकर वैसे भी प्रबंधन ने कोई नेक कार्य नहीं किया है।

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