एम्स ऋषिकेश में आयोजित हिंदी सप्ताह शनिवार को विधिवत संपन्न हो गया। जिसके तहत राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए टिप्पण, हिंदी टंकण,निबंध, अनुवाद, स्वरचित काव्य पाठ आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने एम्स में राष्ट्रभाषा हिंदी पर आधारित कार्यक्रम महज सितंबर माह में ही नहीं बल्कि वर्षभर प्रत्येक माह आयोजित करने का ऐलान किया। जिससे संस्थान में लोगों को हिंदी भाषा में कार्य करने को लेकर प्रेरित किया जा सके। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में अव्वल प्रतिभागियों को प्रशस्तिपत्र भेंटकर सम्मानित भी किया।                                                                                                                                                                           संस्थान में 21 से 28 सितंबर के मध्य हिंदी सप्ताह का आयोजन किया गया। शनिवार को हिंदी सप्ताह के समापन समारोह का बतौर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि एम्स संस्थान हिंदी भाषा में अधिकाधिक कार्य करने को लेकर गंभीर है,लिहाजा इसके लिए चिकित्सकों व गैर चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कार्मिकों को हिंदी में कार्य करने को लेकर संस्थान में प्रत्येक माह हिंदी भाषा पर आधारित कार्यक्रमों का नियमिततौर पर आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के साथ ही हमें निरंतर प्रगति से एक-दूसरे से बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए दूसरी भाषाओं को भी अनिवार्यरूप से सीखना चाहिए। निदेशक एम्स ने संस्थान के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन अधिकारियों से अपने विभागों में हिंदी में कार्य करने की संस्कृति को बढ़ावा देने और कार्यलयी प्रत्रावलियों में अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने को कहा,जिससे दूसरे कर्मचारी भी मातृभाषा के प्रति दायित्व को समझ सकें।                                                                                                                                                                                                     उप​ निदेशक प्रशासन अंशुमन गुप्ता ने ​हिंदी को वैश्विक स्तर की भाषा के तौर पर आगे बढ़ाने की जरुरत बताई, उन्होंने सुझाव दिया कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अकादमिक स्वास्थ्य सेवाओं में एमबीबीएस का पाठ्यक्रम हिंदी में तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस दिन हिंदी को रोजगार की भाषा के तौर पर स्थापित किया जाएगा, उस दिन इसे अपनी पहचान के लिए नहीं जूझना पड़ेगा।                                                                     डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने ​मातृभाषा हिंदी को आत्मसात करने की जरुरत पर जोर दिया, कहा कि हिंदी भाषा को अपनाने में रूचि नहीं लेने पर ही इसे उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाया है,जो कि चिंता का विषय है। डीन एकेडमिक प्रो. गुप्ता ने बताया कि निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत की भाषायी रूचि के मद्देनजर एम्स के केंद्रीय पुस्तकालय में विद्यार्थियों के लिए मेडिकल की पुस्तकों के साथ ही हिंदी साहित्य भी उपलब्ध कराया गया है,जिससे अपनी मातृभाषा के प्रति छात्र-छात्राओं में अभिरूचि पैदा हो।                                                                                                                                इस दौरान संस्थान के विद्यार्थियों व कार्मिकों के प्रोत्साहन के लिए डीन नर्सिंग प्रो. सुरेश के. शर्मा,वरिष्ठ प्रशासन अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल,एकाउंट ऑफिसर सुभाष मलिक आदि ने रचनाएं प्रस्तुत की।                                                                                                                                                                                           जबकि स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता में डा. दिव्या पांडे,रेनू संधू, रवि इंद्रपाल सिंह,जितेंद्र शर्मा,तरन्नुम अहमद, आकाश वार्ष्णेय,टि्वंकल डोगरा,अनुराग कृष्ण शुक्ला ने रचनाएं प्रस्तुत की।  समिति की अध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में डीन एलुमिनाई प्रो. बीना रवि,ब्रिगेडियर सुधीर सक्सेना,डा.सोमप्रकाश बासू, डा.शोभा एस. अरोड़ा,डा. जया चतुर्वेदी,डा. बलराम जीओमर, डा. मोनिका पठानिया,डा. रश्मि मल्होत्रा, राजभाषा अधिकारी व कुलसचिव राजीव चौधरी, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी नीरा तिवारी,सरिता उनियाल, एसई सुलेमान अहमद, ईई एनपी सिंह आदि मौजूद थे।

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