ऋषिकेश, 2 सितंबर।   बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान एवं ज्ञान यज्ञ परिवार के संयुक्त तत्वाधान मे आयोजित ज्ञानात्सव 2019 के तीसरे दिन श्री कृष्ण कुंज आश्रम में विचार मंथन का विषय ’’बेरोजगारी’’ पर बोलते हुए प्रख्यात विचारक श्री बजरंग मुनि जी ने कहा कि व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध कराना राज्य का स्वैच्छिक कर्तव्य होता है, दायित्व नहीं। रोजगार देना राज्य का दायित्व न होते भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है। क्योंकि मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के अभाव में व्यक्ति कभी-कभी अपराध करने को मजबूर हो जाता हैं लेकिन बुद्धिजीवियों ने धूर्ततापूर्वक रोजगार की ऐसी परिभाषा बना दी कि मजबूरी मे काम कर रहे लोगो को रोजगार प्राप्त और उचित रोजगार की प्रतीक्षा मे बैठे को बेरोजगार घोषित कर दिया। किसी स्थापित व्यवस्था द्वारा घोषित न्यूनतम श्रम मूल्य पर योग्यतानुसार कार्य का अभाव ही बेरोजगारी की ठीक परिभाषा हो सकती है।
आचार्य पंकज जी ने कहा कि शिक्षा क्षमता विस्तार के लिये है। रोजगार के लिये है ज्ञान के लिये नहीं। जगत गुरू पीठाधीश्वर कृष्णाचार्य जी ने भी वैदिक काल का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रारंभ मे समाज मे हर वर्ग एवं वर्णो के लिये रोजगार की उचित व्यवस्था थी एवं समाज उन्नत था। सभी को अपनी क्षमता एवं योग्यता के आधार पर रोजगार था। बाद में व्यवस्था विकृत होती गई और विदेशी कम्पनी के आगमन एवं आरक्षण ने रोजगार के अवसर मे काफी विषमता पैदा कर दी और अयोग्य लोग भी रोजगार पाने लगे और योग्य लोग पिछड़ते गये।
विचार मंथन के द्वितीय सत्र का उद्घाटन उत्तराखण्डी फिल्मो के निर्माता निर्देशक के पी डोण्डियाल ने किया। विचार मंथन का विषय ’’महंगाई’’ पर बजरंग मुनि ने अपने मौलिक विचार रखते हुए कहा कि सम्पूर्ण देश मे महंगाई से सभी त्रस्त है। चाहे कोई किसान हो या मजदूर। वह महंगाई का रोना अवश्य रो रहा है। यहां का आदमी तो महंगाई से परेशान है ही गांव वाला भी महंगाई से त्रस्त है।  बडे़ पूँजीपति से लेकर घरेलू महिलाएं भी महंगाई की चिंता व्यक्त करती है। उन्होंने वार्ता को आगे बढ़ाते हुए कहा कि महंगाई के अस्तित्व को प्रचारित करने के लिये पूरे देश मे एक जाल फैला हुए है। रिजर्व बंैक, मुद्रा स्फीति, थोक मूल्य राजकोषीय घाटा आदि अनेक ताने बाने बुनते रहते है। ये सारे तानेबाने एक दूसरे के असत्य या काल्पनिक आकड़ों पर निर्भर रहते है। और सब मिलकर महंगाई के असत्य को समान में सत्य के समान प्रचारित करते है। ऐसी ही ताने बाने से निकले महंगाई के असत्य विचार को हमारे अर्थशास्त्री सत्य के समान स्थापित करते रहते है। उन्होंने महंगाई रोकने का सबसे आसान तरीका बताया कि घाटे को पूरा करने के लिये अनियंत्रित छपाई रोक दी जाये। यदि घाटे का बजट प्रणाली रोक किया जाये तो महंगाई और मूद्रा स्फीति बिल्कुल नही रहेगा।
विचार मंथन के दौरान प्रश्नोत्तर का दौर चलता रहा। सभी उपस्थित सहभागियों ने विषय पर अपने विचार रखे और अपनी शंकाओ का समाधान भी पाया। विचार मंथन कार्यक्रम मे संस्थान के सदस्य डॉ राजे नेगी,उपेन्द्र मिश्रा, रेडी सिंह, रविन्द्र सिंह चैहान, तसवीर फोगाट, जयन्त मंडल, तापस चक्रवर्ती,कोन्थम वीरास्वामी, नागमणी प्रेमनाथ गुप्ता, राम प्रकाश स्वामी, राजेन्द्र देव, दीपक दरगन, अभिषेक शर्मा,सोनू पांडेय, राम कुमार केशरी, इंद्रपाल सिंह यादव,टीकाराम देवरानी,अभ्युदय द्विवेदी उपस्थित रहे।

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