ऋषिकेश, 14 सितंबर ।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में सर्जीकल ओंकोलॉजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित हेड एंड नैक ओंकोलॉजी शल्य चिकित्सा विषय पर आयोजित संगोष्ठी विधिवत संपन्न हो गई। संगोष्ठी में देशभर से 150 से अधिक शल्य चिकित्सकों ने प्र​तिभाग किया। संगोष्ठी में मुहं व गले के कैंसर की सर्जरी की नई तकनीकी के बारे में विशेषज्ञों द्वारा विमर्श किया गया।                                                                                                                                                          संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड में मुहं के कैंसर के मरीजों में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीज कैंसर की आखिरी अवस्था में आते हैं, तब तक उनका उपचार करना काफी चुनौतिपूर्ण हो जाता है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि इस तरह की संगोष्ठियां कैंसर मरीजों के इलाज में आने वाली चुनौतियों के बारे में विचार विमर्श करना आवश्यक हैं।                                                                                                                                                                            संगोष्ठी में संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने रेडिएशन की नई तकनीकि विषय पर व्याख्यान दिया।                                                                          दिल्ली एम्स के कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एसवीएस देव ने देश में मुहं और गले के कैंसर के मरीजों की बढ़ती तादाद के बारे में चिंता जताई। संस्थान के कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. एसपी अग्रवाल ने कैंसर के मामलों को कम करने के लिए तम्बाकू को पूर्णरूप से प्रतिबंधित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पूरी तरह से इस पर रोक नहीं लगाई जाएगी तब तक मुहं के कैंसर के मरीजों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती रहेगी।                                                                                                                                                                                                          एम्स संस्थान के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डा. पंकज गर्ग ने बताया कि यदि कैंसर मरीज शुरुआती दौर में ही चिकित्सक से परामर्श ले व समय पर उपचार प्रारंभ करा ले तो कैंसर को पूर्णरूप से खत्म किया जा सकता है। संगोष्ठी में डा. राजकुमार, डा. धर्माराम पूनिया, डा. भियांराम, डा. महेंद्र पाल सिंह, डा. गीता आर्या, डा. अनु अग्रवाल आदि ने सहयोग किया।

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