ऋषिकेश, 13 सितंबर।  प्रतिवर्ष पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध आदि कर्मों हेतु पितृपक्ष कल पूर्णमासी तिथि के साथ ही आरंभ हो गया है जिसमें अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध आदि कर्म करने वालों के सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
   राजकीय आदर्श इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल के संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया के अन्य पक्षों की तिथियां देव कर्मों के निमित्त सूर्य उदय में शुभ होती हैं परंतु पितरों के निमित्त पितृ पक्ष की तिथियां उत्तरार्ध व्यापी नी अर्थात दोपहर व्यापी नी शुभ मानी जाती हैं इसलिए शास्त्र के अनुसार पूर्णमासी तिथि के तर्पण कल हो गए आज प्रथमा तिथि तथा इस तिथि की वृद्धि होने से कल भी प्रथमा तिथि के तर्पण होंगे
  डॉक्टर  घिल्डियाल बताते हैं कि पितृ पक्ष में जो मनुष्य अपने पूर्वजों के निमित्त ध्यान पूजन तर्पण ब्राह्मण भोजन सहित गाय कौवा तथा कुत्ते को भोजन देता है उसके पिता अक्षय मोक्ष एवं शांति को प्राप्त होते हैं
   क्या है पितर पूजा का वैज्ञानिक आधार
  ज्योतिष वैज्ञानिक डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि गाय कुत्ता एवं कौवे की जो आवाज है उसमें पराश्रव्य तरंगें होती हैं जिनका संपर्क सीधे पितरों एवं देवताओं के  लोक जो पृथ्वी लोक से सबसे नजदीक के  लोक  हैं उनसे होता है इसलिए जो क्षमता मनुष्य के अंदर नहीं है पितरों से संपर्क करने कि इन तीनों के माध्यम से संपन्न हो जाती है इसलिए शास्त्रों के अनुसार पितरों का पूजन और तर्पण संपन्न तब ही माना जाता है जब इन तीनों को भोजन कराया जाता है वैसे तो इन तीनों को वर्ष भर भी भोजन दिया जा सकता है परंतु इन पितरों के दिनों में दिया हुआ भोजन अक्षय फल की प्राप्ति करवाता है
  अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार इस दिन करें श्राद्ध
   दिनांक 13  सितंबर पूर्णिमा  14 को प्रथमा तथा इस अतिथि की वृद्धि होने से 15 को भी प्रथमा 16 को द्वितीय 17 को तृतीय अट्ठारह को चतुर्थी 19 को पंचमी 20 को षष्ठी 21 को सप्तमी 22 को अष्टमी क्या इसको नवमी 24 को 10 मई 25 को एकादशी 26 को द्वादशी 26 को ही वृद्धि होने से त्रयोदशी 27 को चतुर्दशी और 28 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या होने से जिनको अपने पितरों की तिथि ज्ञात ना हो उन सब पितरों का  श्राद्ध इसी दिन सर्वपितृ अमावस्या को संपन्न हो जाता है इसके साथ ही यह पितृ पखवारा भी पूर्ण हो जाएगा।

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