चंद्रमास एवं सौर मास दोनों पद्धतियों से श्रावण मास के तीसरे सोमवार का व्रत आज रहेगा इसी दिन नाग पंचमी पढ़ने से इस वर्ष बहुत विशेष संयोग बन रहा है नागों के सहित भगवान शिव एवं शक्ति के पूजन से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी विशेष रूप से जिनके दांपत्य जीवन में उतार चढ़ाव रहते हैं उनके लिए यह दिन विशेष फलदाई हो गया है
राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल में संस्कृत वक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि संपूर्ण सृष्टि में नौ प्रकार की नाक प्रजातियां हैं क्रमशः अनंत वासुकी शेषनाग पद्मनाभ कंबल शंखपाल धृतराष्ट्र तक्षक एवं कालिया यह 9 प्रकार के नागों की वजह से मनुष्यों की जन्म कुंडली में इसी क्रम से कालसर्प योग पड़ता है ज्योतिष शास्त्र में राहु को सर्प का मुख्य तथा केतु को पूछ की संज्ञा दी गई है
       ज्योतिष वैज्ञानिक डॉक्टर डीआर बताते हैं कि जब राहु एवं केतु वामावर्त गति से सभी ग्रहों को बंधक बना लेते हैं उसे कालसर्प योग कहा जाता है जिन लोगों की कुंडली में उपरोक्त में से कोई भी कालसर्प योग पूर्ण अथवा आंशिक बन रहा हो उनकी ज्योतिषीय चिकित्सा के लिए इस वर्ष आज का दिन स्वर्णिम अवसर बन कर आया है क्योंकि भगवान शिव के गले में नाग हैं और मस्तक पर चंद्रमा है तथा आज चंद्रमा मेडिसिन के कारक बुध की कन्या राशि में संचार करेगा तो सूर्य चंद्रमा में तृतीय दशम अर्थात पराक्रम एवं कर्म भाव का संबंध रहेगा उचित सामग्री मंत्रों द्वारा इस दिन की गई सर्प पूजा समस्त बंधनों से मुक्त करेगी
   किस राशि के जातक कैसे करेंगे पूजा
  मेष तांबे के सर्प रक्त चंदन से वृष चांदी केसर दूध और सफेद तेलों से मिथुन पीतल के सर्प सफेद फूल कर्क चांदी के सर्प मोती और दही से सिंह तांबे के सर्प लाल फूल और लाल चंदन से कन्या पीतल केसर सफेद तिल तोला चांदी के सर्प सफेद फूल वृश्चिक तांबे के सर्प लाल फूलों से धनु अष्ट धातु के सर्प पीले एवं सफेद फूलों से मकर पीतल केसर काले तिलों से कुंभ पीतल के सर्प पीपल के पत्ते बेलपत्र से मीन अष्ट धातु के सर्प जो तिल दूध से
    आचार्य डॉक्टर घिल्डियाल ने बताया कि जिन स्त्री एवं पुरुषों के भी वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव लड़ाई झगड़े यहां तक के मुकदमे बाजी हो वह इस दिन आवश्यक रूप से नागों का उपरोक्त सामग्री एवं विधि से श्रद्धा पूर्वक पूजन करें तो उनके जिंदगी में बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाएगा।

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