देेहरादून। पिछले आठ दिनों से आंदोलनरत पत्रकारों की सभी मांगों को सूचना विभाग ने मान लिया है। मांगे माने जाने के साथ ही पत्रकारों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। मांगों को लेकर शुक्रवार को संजीव पंत ने आमरण अनशन शुरु कर दिया था, मांगें माने जाने के बाद अपर निदेशक सूचना डा. अनिल चंदोला ने श्री पंत को जूस पिलाकर उनका आमरण अनशन समाप्त करवाया। गौरतलब है कि 31 तारीख को निकाले गए मशाल जुलूस में विभिन्न यूनियनों और अलग अलग मीडिया माध्यमों के 74 पत्रकारों की रिकॉर्ड तोड़ शिरकत के बाद संयुक्त संघर्ष मोर्चा का हौसला बुलंद है और यह भी निर्णय लिया गया कि जल्दी ही पत्रकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा से ही एक दल दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर भी धरना देगा और पूरे देश को यह बताया जाएगा कि किस तरह से उत्तराखंड सरकार राज्य के पत्रकारों के साथ दमन की नीति अपनाते हुए सौतेला व्यवहार कर रही है।
धरना स्थल पर एकत्रित पत्रकारों ने एक सुर में यह बात रखी कि जल्दी ही सरकार उनकी मांगों पर अपना रुख स्पष्ट करें ताकि उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पत्रकार अपनी आगे की रणनीति बना सकें। गौरतलब है कि कि 25 जुलाई को अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन की जयंती पर केवल चुनिंदा चहेते पत्रों को ही नियमावली के खिलाफ जाकर विज्ञापन देने के विरोध में शुरू हुआ सांकेतिक धरना पहले ताला और माला आंदोलन में बदला तथा उत्तराखंड की पत्रकारिता के इतिहास में पहली बार राज्य सूचना विभाग पर तालाबंदी की गई। इसके बाद जुलाई महीने के अंतिम दिन कल 31 जुलाई को देहरादून की सड़कों पर विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। अब यह तय किया गया है कि यदि कल 2 तारीख 11 बजे तक सरकार धरना स्थल पर आकर न्यायोचित मांगों को नहीं मानती है तो आमरण अनशन शुरू कर दिया जाएगा। बीते दिन के मशाल जुलूस के बाद से विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी धरना स्थल पर आकर अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए उत्तराखंड पत्रकार संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्यों से संपर्क किया है। पिछले 24 घंटों में तेजी से बदले घटनाक्रम से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि पत्रकारों के साथ की गई एक मनमानी के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन बहुत जल्दी ही व्यापक स्वरूप ग्रहण कर सकता है और पूरा राज्य इसकी चपेट में आ सकता है।

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