ऋषिकेश 13 अगस्त ।भाई बहनों के पवित्र रिश्ते के बंधन का त्यौहार रक्षाबंधन
  20 साल बाद बन रहा है ऐसा शुभ संयोग जब नहीं करना होगा राखी पहनाने के लिए बहनों को मुहूर्त का इंतजार
    भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के बंधन का त्यौहार रक्षाबंधन कल पूरे भारतवर्ष में मनाया जाएगा रक्षाबंधन पर करीब 20 वर्ष बाद ऐसा संयोग आ रहा है जब सुबह 6 बजे से सांय 6:00 बजे तक बहने अपने भाइयों की कलाई में राखी बांध सकती हैं किसी प्रकार के मुहूर्त का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं हो रही है
    उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि रक्षाबंधन पर करीब हर साल भद्रा का साया रहता था जिससे राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कुछ घंटों के लिए सीमित हो जाता था परंतु इस बार रक्षाबंधन पर सुबह से शाम तक अच्छा ही अच्छा समय है रक्षाबंधन वाले दिन श्रवण नक्षत्र सौभाग्य योग सूर्य का कर्क राशि में तथा चंद्रमा का मकर राशि में होना बहुत
 खास संयोग बना रहा है
      यूं सजाएं थाली
  रक्षाबंधन के लिए थाली सजाते समय रेशम के कपड़े में केसर सरसों चंदन चावल व दूर्वा रखकर भगवान की पूजा करनी चाहिए इसके बाद भाई को तिलक लगाकर दाएं हाथ पर राखी बांधे आरती उतारकर मिठाई खिलाएं
 कहां से हुई इस पवित्र त्यौहार की शुरुआत
 आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं की कथा के मुताबिक मध्य युग में राजपूत व मुस्लिमों के बीच जब लड़ाई चल रही थी उन दिनों चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने अपने राज्य को गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से बचाने के लिए हुमायूं को राखी भेजी थी फिर हुमायूं ने उनकी रक्षा का वचन देकर उन्हें बहन का दर्जा दिया था और तभी से रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है भले ही इस त्यौहार के शुरुआत सगी बहनों ने न की हो लेकिन यह त्यौहार भाई-बहन के पवित्र प्यार की निशानी है बहन भाई के कलाई में राखी बांधकर पूरे वर्ष भर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती है तो भाई बहन को यथा सामर्थ्य दान द्रव्य देकर उस को संतुष्ट करने का प्रयास करता है।

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