ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ऋषिकेश) में पहली मर्तबा सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के फटे हुए हार्ट की सफल सर्जरी कर मरीज को जीवनदान दिया गया। चिकित्सकों ने बताया कि यह अपने आप में उत्तराखंड की पहली व जटिलतम सर्जरी है। चिकित्सकों के अनुसार अमूमन दुर्घटना में हार्ट के चोटिल होने से मरीज को बचा पाना काफी मुश्किल होता है। फटे हुए हार्ट की सफलतापूर्वक सर्जरी के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने ट्रामा सर्जरी विभाग की चिकित्सकीय टीम के प्रयासों की सराहना है। निदेशक एम्स ने बताया कि संस्थान में इसी माह से वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस ट्रामा इमरजेंसी सेंटर कार्य करने लगेगा। जिससे दुर्घटना में गंभीर घायलों को त्वरित व बेहतर उपचार दिया जा सके। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि शामली मुजफ्फरनगर निवासी जब्बार (25) एक सड़क दुर्घटना में गंभीररूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना में कार का स्टेयरिंग छाती से टकराने से मरीज का हार्ट फट गया था। मरीज को एम्स के ट्रामा इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। अल्ट्रासाउंड के बाद मालूम पड़ा कि मरीज का हार्ट फट चुका है और चोट के कारण हार्ट से खून रिस रहा है। इसके बाद पेरीकॉर्डियोसेंटेसिस प्रोसिजर से हार्ट से बह रहे खून को बाहर निकाला गया, जिससे मरीज की जीवनरक्षा के लिए उसे इमरजेंसी से ऑपरेशन थियेटर तक ले जाने का समय मिल सके। ट्रामा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद कमर आजम की देखरेख में चिकित्सकों की टीम ने मरीज का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को तीन बार कॉर्डियक अरेस्ट (हार्ट रुक जाना) हुआ था, मरीज को बचाने के लिए लगातार सीपीआर देकर हार्ट को चलाया गया। हार्ट सर्जरी में हार्ट के पार्ट बाएं एट्रियम को रिपेयर किया गया। डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद मरीज को नया जीवनदान मिला। सर्जरी के बाद उसे ट्रामा आईसीयू में एक दिन वेंटीलेटर पर रखा गया जबकि दूसरे दिन वेंटिलेटर से हटा दिया गया । अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अत्यधिक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले चिकित्सकों की टीम में ट्रामा सर्जरी विभाग के डा. अजय कुमार, डा. अवनीश कटियार, डा. नीरज कुमार, डा.रूबी व एनेस्थिसिया डा. शैलेश शामिल थे। निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि यह अपनेआप में ऋषिकेश एम्स में पहला और अत्यधिक चुनौतिपूर्ण ऑपरेशन था,जिसमें संस्थान के कुशल चिकित्सकों ने सफलता अर्जित की। उन्होंने बताया कि अमूमन बड़े ट्रामा सेंटरों पर भी ऐसे मरीज को बचाना मुश्किल होता है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि भविष्य में ऐसे चुनौतिपूर्ण टास्क को बखूबी अंजाम देने के लिए संस्थान में नया ट्रामा सेंटर तैयार हो चुका है, जो विश्वस्तरीय ट्रामा सेंटर सुविधाओं से लैस होगा, सेंटर इसी माह से कार्य करने लगेगा जिसमें 24 घंटे व पूरे सप्ताह इमरजेंसी ट्रामा, ओपीडी, ओटी व रेडियोलॉजिकल जांच की सभी मुकम्मल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

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