ऋषिकेश। जैन समाज की ओर से जैन मुनि आचार्य पुष्पदंत महाराज के शिष्य मुनि सौरभ सागर महाराज का 25वा श्रीपुष्प वर्षायोग (चातुर्मास) समारोह में गुरु पूर्णिमा पर्व के दौरान आज मुख्यातिथि के तौर पर मुनि सौरभ सागर महाराज को पुष्पगुच्छ भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रिंस चौक स्थित जैन धर्मशाला में महोत्सव के दौरान #दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
जैन मुनि आचार्य पुष्पदंत महाराज जी के शिष्य मुनि सौरभ सागर महाराज के 25वें श्रीपुष्प वर्षायोग पर उत्तराखंड का चातुर्मास प्रवास प्रदेश के लिए वरदान साबित होगा।
साधु संतों के चरण जहा पड़ते हैं वह भूमि धन्य हो जाती है। जैन समाज के लोग जहां समाज सेवा में हर समय आगे रहते हैं वहीं जैन समाज देश सेवा के लिए भी हर समय अग्रणीय भूमिका निभाता रहा है।
 श्री तरुण सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी विचारों से सम्पूर्ण जगत को सदमार्ग की राह दिखाई। वे जनमानस के प्रेरणा स्रोत, दया के सागर एवं करुणा के आगार थे। अपने कड़वे प्रवचनों के माध्यम से उन्होंने समाज में #शांति और अहिंसा का संदेश फैलाया।
गुरु पूर्णिमा गुरु-पूजन का पर्व है। सनातन संस्कृति में ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु-शिष्य की लम्बी परम्परा है। बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त करना सम्भव नहीं है। गुरु का आशीर्वाद सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। हमारी सस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है।
जैसी भक्ति की आवश्यकता भगवान के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है। 

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