देहरादून।{ AKA}  कभी प्रदेश की राजधानी देहरादून की जीवन दायनी कहे जाने वाली सुसवा नदी अब बिमारियों की जड़ बन गयी है। देहरादून शहर की सारी गंदगी और सीवर का पानी इस नदी में जाकर मिलता है। यह नदी अपने आस-पास बसे लोगों को जिंदगी की जगह मौत दे रही है। देहरादून  में रहने वाले 11 साल के कुशल को ब्लड़ कैंसर है. 3 साल की उम्र में उसके घर वालों को ये पता चला और अब हर हफ्ते उसका खून बदला जाता है। उसके पिता मजदूरी करके जैसे-तैसे घर चलाते हैं, उस पर ब्लड़ कैंसर की इस बीमारी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। डोईवाला ब्लाक के झडौंद गाँव का कुशल अकेले नहीं हैं जिसे कैंसर की बीमारी हो, उसके पड़ोस में रहने वाले दिवान सिंह की पत्नी भी कैंसर की बिमारी के जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। 2 साल पहले डॉक्टर ने उन्हें कैंसर बताया था। तब से अब तक दिवान सिंह अपनी पत्नी के इलाज के लिए  2 बीघा जमीन बेच चुके हैं। वो जब अपनी पीड़ा बताते है तो उनकी आखो से आंसू छलक उठते है। पड़ौसी गांव नागल बुलंदावाला में भी तीन से चार लोग कैंसर से पीड़ित हैं। गांव के पूर्व प्रधान बताते हैं कि यहां से बहने वाली सुसवा नदी जबसे प्रदूषित हुई है। तब से कैंसर के मरीज बढ़ गए हैं। साथ ही झडौंद और आस-पास के गांव में भी 12 से 15 लोगों को कैंसर है और कई लोगों की कैंसर से मौत भी हो चुकी है। स्पैक संस्था के संस्थापक बृजमोहन शर्मा बीते पांच सालों से सुसवा नदी और घरों के नलकों में आने वाले पानी की टैस्टिंग कर रहे हैं। उनका मानना है कि सुसवा नदी में कैंसर देने वाले तत्व आ गए हैं, जो कि ग्राउंड वाटर के साथ मिल रहे हैं। साथ ही इस क्षेत्र में पानी की आपूर्ति ट्यूबवैल से हो रही है, जिससे ये पानी लोगों को कैंसर दे रहा है। ऐसा नहीं है इलाके के जागरुक लोगों ने इस मसले को उठाया ना हो। इस इलाके के लोग इस मामले को मानवाधिकार आयोग तक लेकर गए थे। आयोग ने निर्णय भी दिया कि रिस्पना नदी, जिससे सुसवा को पानी मिलता है। उसके उदगम् स्थल से 40 प्रतिशत पानी नदी में छोडना जरुरी होगा. लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। देहरादून शहर से बहने वाली दो नदियों से मिलकर बिंदाल और रिस्पना का निर्माण करती हैं। दोनों नदियों में पूरे शहर की गंदगी मिलती ह। जो सुसवा में जाकर उसके पानी को जहरीला बना देती है।

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