ऋषिकेश 16 जुलाई  उड़ान फाउंडेशन द्वारा मायाकुंड में संचालित निःशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान में आज उत्तराखण्ड का लोकपर्व हरेला एवं गुरु पूर्णिमा पर्व के उपलक्ष्य में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्कूल परिसर में स्कूली बच्चो द्वारा फुलदार पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।इस अवसर पर स्कूली बच्चो को लोकपर्व हरेला के बारे में जानकारी देते हुवे स्कूल के संस्थापक डॉ राजे नेगी ने बताया कि उत्तराखण्ड एक पहाड़ी प्रदेश है और पहाड़ों पर ही भगवान शंकर का वास माना जाता है। इसलिए उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला पर्व के तहत सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है। इसमें मिट्टी डालकर गेहूँ, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि पांच या सात प्रकार के बीजों को बो दिया जाता है। नौ दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह को पानी छिड़कते रहते हैं। दसवें दिन इसे काटा जाता है। चार से छ इंच लम्बे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है। घर के सदस्य इन्हें बहुत आदर के साथ अपने शीश पर रखते हैं। घर में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में हरेला बोया व काटा जाता है, इसके मूल में यह मान्यता निहित है कि हरेला जितना बड़ा होगा उतनी ही फसल बढ़िया होगी! साथ ही प्रभू से फसल अच्छी होने की कामना भी की जाती है। स्कूली बच्चो को गुरु पूर्णिमा के महत्व की जानकारी देते हुवे डॉ नेगी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है।हिन्‍दुओं में गुरु का सर्वश्रेष्‍ठ स्‍थान है।यहां तक कि गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर है क्‍योंकि वो गुरु ही है जो हमें अज्ञानता के अंधकार से उबारकर सही मार्ग की ओर ले जाता है. मान्‍यता है कि इसी दिन आदिगुरु, महाभारत के रचयिता और चार वेदों के व्‍याख्‍याता महर्षि कृष्‍ण द्वैपायन व्‍यास यानी कि महर्षि वेद व्‍यास का जन्‍म हुआ था, वे संस्कृत के महान विद्वान थे, महाभारत  जैसा महाकाव्य उन्‍हीं की देन है। इस अवसर पर मीनाक्षी राणा,मयंक भट्ट,प्रियंका कुकरेती,शीला पोखरियाल,प्रिया क्षेत्री,मंजू देवी,आशुतोष कुड़ियाल आदि जन उपस्थित थे।

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