श्रीनगर: जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती हुर्रियत नेताओं की पैरवी करते हुए कहा है कि यदि वो (हुर्रियत) बातचीत के लिए तैयार हैं तो भारत सरकार को उनके साथ बातचीत करनी चाहिए। दरअसल हुर्रियत के एक धड़े की तरफ से हाल ही में ये कहा गया कि वो भारत सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं। इसी पर टिप्पणी करते हुए मुफ्ती ने कहा कि अगर हुर्रियत बातचीत के लिए तैयार है तो केंद्र सरकार को इस मौके का फायदा उठाते हुए बातचीत शुरू करनी चाहिए। महबूबा मुफ्ती पहले भी हुर्रियत के साथ बातचीत की पैरवी कर चुकी हैं।

अवसर का फायदा उठाए केंद्र सरकार- महबूबा

 मीडिया से बात करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'हुर्रियत के धड़े के द्वारा कहा जा रहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं। यदि हुर्रियत बातचीत के लिए तैयार है तो केंद्र सरकार को इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए तथा हुर्रियत के साथ बातचीत जरूर रनी चाहिए।' यह पहला मौका नहीं है जब महबूबा मुफ्ती ने हुर्रियत की पैरवी की हो, वह पहले भी इसी तरह का बयान दे चुकी है। तब महबूबा ने कहा था कि पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार का मकसद सभी पक्षकारों के बीच वार्ता कराना था।

राज्यपाल ने कहा था हुर्रियत बातचीत को तैयार
कुछ दिन पहले जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया था। मलिक ने कहा था कि जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेता केंद्र सरकार से बातचीत करने को तैयार हैं। उन्होंने तब कहा था, 'जब मैं यहा आया था तबसे चीजें बहुत बेहतर हुई हैं। हुर्रियत को ही देखें, रामविलास पासवान उनके दरवाजे पर खड़े थे लेकिन उन लोगों ने अपना दरवाजा नहीं खोला। अब वह बातचीत करने के लिए तैयार हैं। '

कुछ समय पहले महबूबा ने की थी अलगाववादी नेताओं की रिहाई की मांग
महबूबा मुफ्ती ने इसी साल अप्रैल में अलगाववादी नेता यासिन मलिक की रिहाई की मांग करते हुए कहा था,  ' अलगाववादी नेता यासीन मलिक को तत्काल रिहा किया जाए, वह हकीकत में बीमार हैं। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी के अन्य सदस्यों को भी रिहा किया जाए।' तब केंद्र पर निशाना साधते हुए महबूबा ने साध्वी प्रज्ञा की तुलना अलगावादियों से करते हुए कहा था कि प्रज्ञा ठाकुर पर कई आरोप हैं उन्हें क्लीन चिट मिल गई है। 

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