देहरादून। उत्तराखण्ड में आग बुझाने के मामले में वन विभाग फिर विफल साबित हो रहा है। बढ़ती जंगलों की आग ने वन विभाग की नींद उड़ा कर रख दी है। प्रदेश में जंगलों के धधकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। खासकर, आठ जिलों में जंगल ज्यादा धधक रहे हैं और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इन जिलों में अब तक आग की 1466 घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 2138 हेक्टेयर जंगल झुलस चुका है। इस बीच शनिवार को भी अनेक स्थानों पर लगी आग ने वनकर्मियों के पसीने छुड़ाए रखे। टिहरी में तो जंगल की आग एक कॉलोनी के बिल्कुल नजदीक आ गई, जिससे वहां अफरातफरी मच गई। जैसे-तैसे फायर ब्रिगेड के जरिये आग पर काबू पाया गया। 
उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, टिहरी समेत अन्य जिलों में भी जंगल सुलग रहे थे। धुएं के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में छाई धुंध परेशानी का सबब बनी हुई है। नोडल अधिकारी वनाग्नि प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार देर शाम तक राज्यभर में 50 से ज्यादा स्थानों पर आग की सूचना थी। आग पर काबू पाने के लिए वनकर्मी जुटे हुए थे। प्रदेशभर में शनिवार शाम तक जंगल की आग की 1708 घटनाएं हो चुकी थीं, जिनमें 2344.455 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। 
जंगल की आग से सबसे अधिक असर आठ जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़ और टिहरी पर पड़ा है। इन जिलों में अब तक 1466 घटनाओं में 2138.785 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक क्षति अल्मोड़ा जिले में हुई है, जहां 719.9 हेक्टेयर जंगल झुलस चुका है। पिथौरागढ़ और चमोली में कुछ राहत मौसम के रुख बदलने से पिथौरागढ़ और चमोली जिले के कुछ क्षेत्रों में हुई बारिश ने चढ़ते पारे पर लगाम कसने के साथ ही वन महकमे को राहत दी है। इन क्षेत्रों में बारिश से कई स्थानों पर जंगल की आग बुझी है।

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