देहरादून 5 जून। अपने के बजाय अपनों के लिए कार्य करने की संगठन के कार्यकर्ताओं की मनोवृति होनी चाहिए। भारत की राष्ट्रीयता सांस्कृतिक है कोई जमीन का टुकड़ा नहीं। राष्ट्र की अनुभूति समान दुख सुख के अनुभव में है। शरीर के लिए स्वास्थ्य बुद्धि के लिए विचार और आत्मा के लिए ईश्वर का साक्षात्कार मनुष्य को पूर्ण बनाता है।किसी भी संगठन के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता और वैचारिक स्पष्टता आवश्यक है। राष्ट्र के विकास की अवधारणा हृदय से आत्मसात करने पर ही होती है।
उक्त बातें अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समापन अवसर पर, द इंडियन पब्लिक स्कूल के सभागार, देहरादून में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उच्च शिक्षा शिक्षा संवर्ग के राष्ट्रीय प्रभारी महेंद्र कुमार ने कही। उन्होंने आगे कहा कि संगठन केवल भावनाओं से नहीं बल्कि निरंतर संघर्ष से बनता है। आने वाली सदी भारतीय विचार की होगी । साम्यवाद का पराभव हो चुका है क्योंकि वह समाज को एक मशीन और मनुष्य को पुर्जा  मानता है। भारतीय विचार मनुष्य को उसकी संपूर्णता में स्वीकार करती है।
उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री माननीय डॉक्टर धन सिंह रावत जी ने विश्वास दिलाया कि महासंघ जो भी निर्णय लेगा सरकार उसको प्रभावी रूप से क्रियान्वित करेगी। आप सब के सुझाव मार्गदर्शन का काम करते हैं। सरकार शिक्षकों के हित के लिए निरंतर प्रयासरत है और इसके लिए उच्च शिक्षा में निरंतर प्रयास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए किया जा रहा है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो जे पी सिंघल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि शिक्षक का दायित्व समाज के प्रति है और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका अहम है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ शिक्षकों के लिए समस्याओं के निराकरण के लिए निरंतर कार्यरत है। सरकार समस्याओं का समाधान त्वरित गति से करें। इसलिए निरंतर अपनी बात हम मजबूती से सरकार के समक्ष रखते हैं।    

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