स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, संत श्री मुरलीधर जी महाराज, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और सभी भक्तों ने श्री पंत जी आत्मा की शान्ति हेतु मौन रखा

श्री प्रकाश पंत जी के रूप में हमने पहाड की बुलंद आवाज को खो दिया-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 6 जून। परमार्थ निकेतन गंगा तट पर राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, माँ गंगा सहित देश की सभी नदियों को समर्पित मानस कथा के मंच से उत्तराखंड सरकार के वित्तमंत्री श्री प्रकाश पंत जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। माँ गंगा से उनकी आत्मा की शान्ति हेतु सभी ने प्रार्थना की।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हमने आज केवल वित्त मंत्री ही नहीं खोया बल्कि हमने पहाड़ की एक बुलंद आवाज को असमय खो दिया है। ईश्वर उनके परिवार को इस हृदयविदारक घड़ी से उबरने की शक्ति प्रदान करे। स्वामी जी ने कहा कि हम सभी पंत परिवार के साथ है।
स्वामी जी ने श्री प्रकाश पंत जी के परमार्थ प्रवास और चर्चा को याद करते हुये कहा कि उन्होने हमेशा विकास की राजनीति की। श्री पंत जी हमेशा आपने कार्यो की वजह से हमारे बीच जीवंत बने रहेंगे।
मानस कथा व्यास श्री मुरलीधर जी के मुखारबिन्द से परमार्थ गंगा तट पर मानस की ज्ञान रूपी गंगा प्रवाहित हो रही है। श्री राम कथा का सीधा प्रसारण संस्कार चैनल पर हो रहा है। जिसके माध्यम से देश-विदेश में बैठे श्रीराम भक्तों को भी श्रीराम कथा के साथ पूज्य संतों की अमृत वाणी सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
 परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जन्म और मृत्यु के बीच का जो समय है वही जीवन है अतः सांसों के रूक जाने से पहले इस दुनिया के लिये कुछ श्रेष्ठ करके जायें। उन्होने कहा कि सत्कर्म करने के लिये श्रेष्ठ समय का इंतजार न करें। न जाने कब सांसों का खजाना खत्म हो जाये इसलिये इस पूरे संसार को प्रभु की दिव्य रचना समझ कर हमसे जो बन पड़े सेवा करते रहें।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमने कैंसर के कारण आज अपने प्यारे नेता को खो दिया। मानव के अवैज्ञानिक क्रियाकलापों के कारण चारों ओर जो प्रदूषण बढ़ रहा है और उससे ही अनेक प्रकार की बीमारियां हो रही है। उन्होने सभी से आह्वान किया कि प्रकृति के सान्निध्य में योगमय जीवन जीने से हम कुछ हद तक इन बीमारियों को कम कर सकते है।
परमार्थ गंगा तट पर श्री पंत जी आत्मा की शान्ति हेतु विशेष हवन किया गया और मौन रहकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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