ऋषिकेश, 1 जून। परमार्थ निकेतन में विश्व अभिभावक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर सभी ऋषिकुमारों ने वेद मंत्रों के साथ माँ गंगा से अपने अभिभावकों के स्वस्थ जीवन की प्रार्थना की। आज की परमार्थ गंगा आरती इस सृष्टि को आगे बढ़ाने में अभिभावकों की निःस्वार्थ भागीदारी के लिये समर्पित की गयी।
 आज परमार्थ गंगा तट पर सुश्री गंगानन्दिनी त्रिपाठी जी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी की पावन उपस्थिति में सैकड़ों लोगों को योगाभ्यास कराया। एक माह तक चलने वाली मानस कथा का श्रवण करने आये श्रद्धालुओं को श्री रामकथा के साथ अनेक अमूल्य अवसर प्राप्त हो रहे है जिसमें योग, पूज्य संतों के दर्शन, संतों का मार्गदर्शन, सत्संग, कीर्तन और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों का आनन्द प्राप्त हो रहा है। वास्तव में यह मास उत्सव का मास है।

 परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अभिभावक अर्थात माता-पिता हमेशा अपने बच्चों के साथ खड़े रहते है चाहे परिस्थितियाँ कुछ भी हो। बच्चों की जीवन यात्रा को सफल बनाने में निःस्वार्थ परिश्रम करते है अभिभावक। अपने बच्चों के निर्माण में माता-पिता जो बलिदान देते है वास्तव में वह सराहनीय है। स्वामी जी ने बताया कि मेरी झोपड़ी में एक छोटी सी चिड़ि़या है उसने कहीं-कहीं से रूई एकत्र कर घोसला बनाया है उसमें उसके बच्चे है उन बच्चों को वह पूरी सुरक्षा देते हुये वह रात-दिन वहीं पर बैठी रहती है और जब शाम-सुबह ठंड होती है तो उन बच्चों को गर्मी देने के लिये उनके उपर बैठ जाती है और जब उन्हे गर्मी लगे तो उनके उपर रखी रूई भी खोल देती है। दिन में एक दो बार उन बच्चों के पिता अपनी चोंच में दाना लाकर उस मादा चिड़िया को देता है कभी वह नर चिड़िया को देर हो जायें फिर भी वह मादा चिड़िया वहां से कहीं नहीं जाती है यह है माता-पिता का बच्चों के प्रति सुरक्षा और समर्पण का भाव। वास्तव में माता-पिता का त्याग सबसे बड़ा होता है।

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