देहरादून। लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में इस बार राष्ट्र की सुरक्षा को सीमा पर तैनात जवानों ने भी बढ़चढ़ कर भागीदारी निभाई। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों सीटों पर फौजी मतदाताओं के वोट, यानी पोस्टल बैलेट में लगभग साढ़े तीन गुना बढ़ोतरी इसकी तस्दीक करती है। 

इस बार 65,374 यानी कुल 71 फीसद सैन्य मतदाताओं ने अपने वोट डाले। यह प्रदेश के मतदान प्रतिशत से भी 10 फीसद अधिक है। वर्ष 2014 के लोस चुनावों में यह आंकड़ा केवल 18490 था। प्रदेश की पांचों सीटों पर वापस आए पोस्टल बैलेट में से तकरीबन 83 फीसद विजयी भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में खुले। 

उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश है। बड़ी संख्या में उत्तराखंड वासी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े वोटर हर चुनाव में अहम भूमिका में रहते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा व सैनिक कल्याण जैसे मुद्दों पर ये खुल कर अपने वोट के माध्यम से अपनी बात रखते भी हैं। 

उत्तराखंड में इस बार 90845 सर्विस मतदाता थे। आयोग ने नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन सभी की संबंधित यूनिटों में मतपत्र भेजे थे। इनमें से 65374 वोट मतगणना से पहले मतगणना केंद्रों तक पहुंचे। 

2014 के चुनावों में भी प्रदेश में तकरीबन 70 हजार सर्विस मतदाता थे, लेकिन इनमें से 18 हजार से कुछ अधिक पोस्टल बैलेट ही वापस आए थे। इससे यह तो साफ हो गया कि इस बार सैन्य मतदाताओं ने न केवल अपने मतदाताधिकार का प्रयोग किया बल्कि खुल कर अपनी पसंद का इजहार भी किया। 

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