देहरादून I मोदी कैबिनेट में जगह बनाने वाले उत्तराखंड में हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक गुरबत की जिंदगी से गुजरकर संघर्ष के दम पर शिखर तक पहुंचे है। पौड़ी गढ़वाल के पिनानी में गरीब परिवार में जन्में निशंक की जीवन यात्रा कई उतार चढ़ावों से गुजरी। 

सरस्वती शिशु मंदिर के आचार्य से मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनने की उनकी यात्रा बेहद अनूठी है। जोशीमठ स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में निशंक प्राचार्य रहे। जो उनके जीवन का कठिन दौर था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक होने के साथ-साथ उन्हें अध्यापन का दोहरा दायित्व निभाना होता था।  

उनके विद्यालय के छात्र रहे बृजेश सती कहते हैं, जब मैं पांचवीं कक्षा का विद्यार्थी था, तब निशंक जी स्कूल के प्रधानाचार्य थे।’ अध्यापन कार्य के दौरान निशंक समाज सेवा और सक्रिय राजनीति से जुड़ गए। राजनीति में उनके कदम जमें तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अस्सी के दशक में निशंक उत्तराखंड राज्य के संघर्ष समिति के केंद्रीय प्रवक्ता बनें। 1991 में वे पहली कर्णप्रयाग विधानसभा से निर्वाचित हुए और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे। वे इस सीट पर 1993 और 1996 में भी चुनाव जीते। 

वे उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में पांच बार विधायक निर्वाचित हुए और दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। 2009 में मुख्यमंत्री बनें और अब केंद्रीय मंत्री बनने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है। 

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