’’जिन्दगी से करे प्यार, नशे को करे इनकार’’-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
 ऋषिकेश, 31। परमार्थ निकेतन गंगा तट पर राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, माँ गंगा सहित देश की सभी नदियांे को समर्पित मानस कथा के मंच से प्रतिदिन हजारों लोग कथा का आनन्द ले रहे है तथा संस्कार चैनल के माध्यम से लाइव लाखों लोगों तक जागरण का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।
 मानस कथा व्यास श्री मुरलीधर जी के मुखारबिन्द से माँ गंगा के तट पर मानस की ज्ञान रूपी गंगा प्रवाहित हो रही है। श्री राम कथा का सीधा प्रसारण संस्कार चैनल पर हो रहा है। जिसके माध्यम से देश-विदेश में बैठे श्रीराम भक्तों को भी श्रीराम कथा के साथ पूज्य संतों की अमृत वाणी सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कथा के माध्यम से स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज प्रतिदिन सामाजिक समस्याओं पर चर्चा करते है एवं उनके द्वारा समाधान के विषय में भी चिंतन किया जाता है।
आज विश्व तम्बाकू दिवस पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि तम्बाकू और धूम्रपान हमारे बच्चों को हमसे छीन रहा है। हमें एक नशा मुक्त भारत बनाना है क्योंकि दुनिया भर में प्रतिवर्ष 70 लाख और भारत में 10 लाख मौतें धूम्रपान के कारण होती है। उन्होने कहा कि जीवन, ईश्वर प्रदत्त उपहार है अतः जीवन के महत्व को समझे और उसे नशीली चीजंे खाकर बर्बाद न करे। ये नशीली वस्तुयें कुछ समय के लिये तो आपको खुशी दे सकती है परन्तु धीरे-धीरे जीवन का आनन्द छीन लेती है तथा इसका सेवन कर व्यक्ति जीवन की वास्तविकता से दूर होता चला जाता है। उन्होने कहा कि अगर हमें अपने जीवन से प्यार है तो धूम्रपान से दूर रहना होगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अगर किसी घर में धूम्रपान किया जाता है तो उस घर में जन्म लेने वाले बच्चे भी सेकड हैंड स्मोकिंग के शिकार होते है और इस तरह की स्मोकिंग भी उतनी ही घातक है जितनी की स्मोकिंग क्योंकि बच्चे बड़ों की तुलना में अधिक संास लेते है अतः स्मोकिंग का धुआँ उनके फेफड़ों में अधिक जाता है जिससे वे घातक बीमारियों की चपेट में आ सकते है। ऐसे बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है तथा ऐसे बच्चों को दिमागी लकवा होने की सम्भावनायें भी अधिक होती है।
मानस कथा व्यास श्री मुरलीधर जी ने कहा कि मनुष्य को सरल, सात्विक और मर्यादित जीवन जीना चाहिये। नशा चाहे बाहर हो या भीतरी दोनों घातक होते है। बाहर का नशा शरीर को नष्ट करता है तथा भीतरी नशा यथा काम, क्रोध, अहंकार, लोभ और इस तरह के अन्य विकार मनुष्य जीवन की सभी सम्भावनाओं को समाप्त कर देती है इसलिये नशा और विकारों से युक्त जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है।
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि हमें सोशल मीडिया, समाचार पत्र और अन्य सूचना साधनों से पता चलता है कि कहीं पर कोई दुःखद घटना घटी और उसमें कुछ लोगों की असमय मौत हो गयी तो पूरा देश दुःखी हो जाता है वही दूसरी ओर भारत जैसे आध्यात्मिक और संस्कार सम्पन्न देश में धूम्रपान की वजह से प्रतिवर्ष 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है उसमें अनेक युवा भी होते है क्या यह आकड़ा हमें अपनी जवाबदारी का एहसास नहीं कराता। हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने बच्चों को धूम्रपान और नशा के बारे में बताये उन्हे जागरूक करे फिर भी वे नशे में लिप्त हो गये है तो उन्हे प्यार से जीवन के महत्व के बारे में समझाये और असमय मौत की ओर जाने से रोके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आह्वान किया कि ’’जिन्दगी से करे प्यार, नशे को करे इनकार’’ उन्होने नशा मुक्त जीवन जीने का संकल्प कराया।

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