ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में नेशनल वायरल हैपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत आयोजित कार्यशाला में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए राजकीय चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य सरकार की पहल पर एम्स में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में अपने संदेश में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि यह बीमारी साइलेंट किलर की तरह मारक है। उन्होंने बताया कि 95 फीसदी मरीजों को इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता है। निदेशक प्रो.रवि कांत ने इसके लिए टेस्ट एंड ट्रीट पॉलिसी जांच एवं उपचार की रणनीति को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से इस बीमारी हैपेटाइटिस सी की जांच के लिए फ्री किट व दवाएं उपलब्ध करा रही है। लिहाजा चिकित्सकों को चाहिए कि वह इसका इस्तेमाल हाई रिस्क ग्रुप पर करें व लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें। एनएचएम के मिशन डायरेक्टर वाईके पंत ने कहा कि राज्य सरकार व ऋषिकेश एम्स को इस बीमारी से लड़ने के लिए साथ मिलकर कार्य करना होगा, तभी इस पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एम्स से न सिर्फ ट्रेनिंग बल्कि कई अन्य मामलों में भी सरकार को सहयोग की अपेक्षा है। ट्रेनिंग को-ऑर्डिनेटर डा.अजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि सरकार की ओर से नेशनल वाइरल हैपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम जुलाई 2018 में लॉन्च किया गया है। बताया कि  एम्स संस्थान में आगे भी नियमित तौर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फिजिशियन के प्रशिक्षण के बाद आगे लैब टैक्निशियन,नर्स व डेटा एंट्री ऑपरेटर को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रोग्राम के नोडल ऑफिसर डा.पंकज कुमार सिंह ने इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। आयोजन समिति से जुड़े प्रो.प्रतिमा गुप्ता, डा.रोहित गुप्ता, डा.गीता नेगी, डा.दीप ज्योति कलिता, डा.अजीत सिंह भदौरिया,डा.नंदन सिंह बिष्ट, डा.अशोक ने व्याख्यान दिया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो.सुरेखा किशोर, डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो.मनोज गुप्ता, डीन प्लानिंग प्रो.लतिका मोहन आदि मौजूद थे।

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