अत्याधुनिक विदेशी पिस्टल 57 कारतूसों के साथ किया बरामद
उत्तर प्रदेश के बलिया में  हत्या, बलवा, गैगेस्टर, गुण्डा अधिनियम एवं धोखाधड़ी के 29 मुकदमें हैं दर्ज
15 साल से चल रहा था फरार
देहरादून। एक रजिस्ट्री से 15 साल से फरार चल रहे मोस्टवाण्टेड दो लाख के ईनामी कौशल कुमार चैबे का राज खोल दिया। जिसके बाद एसटीएफ की टीम ने चैबे को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ की टीम ने उसके कब्जे से एक विदेशी ग्लाॅक पिस्टल प्वाइंट 40 के साथ 57 कारतूस बरामद किये। पुलिस ने उसके पास से पिस्टल की चार मैगजीन व एक फोल्डिंग बट बरामद की। चैबे के खिलाफ बलिया में 29 हत्या, लूट, मारपीट व जान से मारने के प्रयास के मुकमदें दर्ज है।
एसटीएफ की उपमहानिरीक्षक रिधिम अग्रवाल  ने बताया कि एसटीएफ को सूचना प्राप्त हो रही थी कि, उत्तर प्रदेश के कुछ शातिर व ईनामी अपराधी उत्तराखण्ड में शरण लेकर रह रहे हैं। इस सूचना पर निरीक्षक संदीप नेगी के नेतृत्व में एसटीएफ की एक टीम का गठन कर कार्यवाही करने के लिए लगाया गया। इस टीम ने  कार्यवाही करते हुए उत्तर प्रदेश के कुछ शातिर व ईनामी अपराधियों को चिन्हित किया गया तथा उनके व उनके परिवार तथा उनसे सम्पर्क करने वालों व्यक्तियों के सम्बन्ध में सूचना संकलन की कार्यवाही आरम्भ की गई । विगत एक महीने से एसटीएफ उत्तराखण्ड ऐसे कुख्यात अपराधी की तलाश में अपराधियों की शरण स्थली बने उत्तराखण्ड के हरिद्वार, देहरादून तथा ऋषिकेष के विभिन्न बैंकों में अपराधी के सम्बन्धियों के बैक एकाउण्टांे, केबिल कनेक्शनों, पानी व बिजली के कनेक्शनों तथा जमीन सम्बन्धित सम्पत्तियों की रजिस्ट्रियों की निगरानी कर जानकारी संकलित की जा रही थी। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के कुख्यात ईनामी अपराधी कौशल कुमार चैबे पुत्र  स्व. कमल नाथ चैबे निवासी चैन छपरा थाना हल्दी जनपद बलिया के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुए। सूचना पर एसटीएफ की टीम ने कार्य करते हुए जनपद देहरादून के थाना नेहरूकालोनी क्षेत्रान्र्तगत हरिद्वार बाई पास रोड पर रिस्पना के समीप स्थित एक होटल मीनाक्षी के सामने सड़क पर गिरफ्तार किया गया, जो कि आज अपने पुत्रों कीर्तीमान व दीप्तीमान से मिलने के लिए देहरादून आ रहा था। गिरफ्तारी के दौरान कुख्यात कौशल कुमार चैबे के कब्जे से एक विदेशी ग्लाॅक पिस्टल प्वाइंट 40 मय 57 जिन्दा कारतूस  तथा 04 मैगजीन व एक फोल्डिग बट बरामद किया गया। ईनामी अपराधी चैबे की गिरफ्तारी के सम्बन्ध में जनपद देहरादून के थाना नेहरूकालोनी में अभियोग पंजीकृत कराया गया।
उपमहानिरीक्षक रिधिम अग्रवाल  ने बताया कि विगत 15 वर्षो से आतंक का पर्याय बने उत्तर प्रदेश राज्य का मोस्ट वाण्टेड दो  लाख का कुख्यात ईनामी अपराधी चैबे  विगत दस वर्षो से हिमाचल व उत्तराखण्ड में स्थान बदल- बदलकर रह रहा था। एसटीएफ की टीम की नज़र उनके पुत्रों पर थी जिनके देहरादून में कार के शोरूम है। लेकिन वह उनके इतनी प्लानिंग से मिलता था कि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती थी।
कुख्यात अपराधी चैबे के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर ज्ञात हुआ है कि वह बलिया टेªजरी के हेड आफिस में एकाउण्टेन्ट के पद पर कार्य करता था। इसके परिवार के लोगों का ग्राम प्रधान को लेकर गाॅव में झगड़ा हो गया था, इसी झगड़े में विपक्षीगण ने कौशल कुमार के पिता को गोली मारी थी परन्तु वह बच गया था। इसी रंजिश में काश्षल कुमार ने अपने विपक्षी पप्पू चैबे पर गोली मारी थी लेकिन वह बच गया। कौशल कुमार चैबे ने उक्त घटना के बाद कोर्ट में सरेण्डर कर दिया तथा बाद में जमानत पर रिहा हो कर जेल से बाहर आ गया था। जेल से बाहर आने पर कौषल कुमार चैबे का पप्पू चैबे से आपसी समझौता हो गया था, परन्तु कुछ दिनों बाद पप्पू चैबे की हत्या हो गई थी जिसमें कौशल कुमार चैबे नामजद होने पर उसको गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी मामले में जमानत पर बाहर आने के बाद ग्राम प्रधान के चुनाव में दोबारा परिवार के विवाद आरम्भ हो गये और विवाद में कौशल चैबे के चाचा दुर्गादीन चैबे ने कौशल चैबे के भाई अजित चैबे पर फायर कर दिया जो बच गया था, परन्तु अजीत चैबे ने अपने चाचा दुर्गादीन की हत्या कर दी थी।
जमानत पर आने के बाद कौशल चैबे ने पप्पू सिंह नाम के एक व्यक्ति के साथ मिलकर बलिया (माॅझी) पीडब्लूडी में ठेकेदारी का काम शुरू किया गया परन्तु हिस्सेदारी को लेकर पप्पू सिंह एवं कौषल चैबे के मध्य विवाद हो गया था, बाद में पीडब्लूडी के उक्त ठेके को कौशल चैबे ने अकेले ही ले लिया था। इसी बात को लेकर पप्पू सिंह कौशल चैबे से आपसी रंजिश रखता था। इसी दौरान पप्पू सिंह का किसी इंजीनियर से विवाद होने के कारण पप्पू सिंह ने एक इंजीनियर को रेलवे स्टेशन पर मरवा दिया था जिसमें व एक पुलिस कर्मी की भी हत्या हुई थी।
 वर्ष 2004 में बलिया पीडब्लूडी आफिस में एक टेण्डर प्रक्रिया के दौरान पप्पू सिंह व कौशल चैबे के भाई अजित चैबे, अरूण चैबे के बीच टेण्डर को लेकर मारपीट व फायरिंग हो गई थी, जिसमें पप्पू सिंह के गु्रप के चार व्यक्तियों की हत्या हो गई थी तथा कौशल चैबे का भतीजा शेरा चैबे भी घायल हो गया था, जिसे कौशल चैबे का बेटा अंशुमन चैबे इलाज के लिये अस्पताल ले गया था। इसी दिन पुलिस से हुई मुठभेड़ में कौशल चैबे का बेटा अंशुमन मारा गया था। इसी रंजिश के कारण कौशल चैबे के भाई शैलेन्द्र कुमार चैबे की भी हत्या हो गई थी तथा इसी रंजिश व विवाद के चलते कौशल चैबे के भाई अरूण कुमार चैबे के साले ने पप्पू सिंह गु्रप के दो व्यक्तियों की हत्या कर दी  थी।
  बलिया में पीडब्लूडी की उक्त घटना के बाद से ही अपराधी कौशल कुमार चैबे ने अपना घर छोड़ दिया था तथा पुलिस की गिरफ्तारी के डर से छिपने तथा काम करने के उद्वेश्य से हरिद्वार आ गया था । हरिद्वार में पूजा-पाठ का काम करते हुए हरिद्वार से ही बलिया के काम को देखता था। इसी दौरान अपराधी कौशल कुमार शिमला में भी 2-3 साल रह कर ठेकेदारी का काम करता रहा उसके बाद अपने रहने का ठिकाना बदल-बदल कर भट्टा गांव (मसूरी), नरेन्द्रनगर (टिहरी), नेपाली तिराहा (रायवाला) एवं वर्ष 2019 माह फरवरी से हरिपुरकलां (रायवाला) में अपनी पत्नी के साथ अपने फ्लैट मे रह रहा था। गिरफ्तार अपराधी कौशल कुमार चैबे ने पूछताछ के दौरान बताया कि, जब वह शिमला में रह रहा था तब एसटीएफ उत्तर प्रदेश की टीम इसे गिरफ्तार करने शिमला आई थी परन्तु एसटीएफ उप्र की टीम से आमना सामना होने के बावजूद वह निकल कर भाग गया था। इसके अलावा देहरादून-ऋषिकेष में कौशल कुमार चैबे के बेटों के शादी के अवसर भी अपराधी कौशल चैबे की मौजूदगी की सम्भावना के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने उसकी गिरफ्तारी करने का प्रयास किया परन्तु उस समय यह नहीं मिल सका। कुख्यात अपराधी कौशल कुमार चैबे के विरूद्व बलिया में हत्या, बलवा, गैगेस्टर, गुण्डा अधिनियम एवं धोखाधड़ी आदि से सम्बन्धित लगभग 29 मुकदमें पंजीकृत है।


कुख्यात को पकड़ने वाली एसटीएफ की टीम
निरीक्षक संदीप नेगी, हैडकाॅस्टेबल वेद प्रकाश भट्ट, काॅस्टेबल लोकेन्द्र सिंह व महेन्द्र सिंह

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