ऋषिकेश। हरि  ओम  तत्सत : वरुण सृष्टि कल्याण ट्रस्ट द्वारा संचालित अखंड महायोग के संस्थापक महायोगी स्वामी अखंडानंद जी तपोवन ऋषिकेश से इंटनेशनल योग महोत्सव  अपने कार्यक्रम मे स्वामी  जी ने योग  के वास्तविक सवरूप को समझाया महायोगी जी ने बताया कि लोग योग के नाम पर भर्मित हो रहे है !केवल आसान, प्रणायाम,  तक सिमित हुए जबकि ये सब अष्टांग योग के अंग महृषि पतंजलि द्वारा दिए गए योग करने की छमता लाने के  लिए स्वास्थ्य रहने के  लिए कियोकि  एक स्वास्थ्य शरीर ही योग को प्राप्त कर सकता है !और महायोग की और जा सकता है ! स्वामी जी से पूछा वास्तविक योग की क्या परिभाषा है? स्वामी जी  ने बताया कि प्राप्त की प्राप्ति का नाम ही योग है ! योग कभी होता नहीं, फिर क्या होता है? केवल भ्रान्ति होती है ! भ्रान्ति क्यों होती है? भ्रान्ति मल और विक्षेप के कारण होती है ! मल और विक्षेप क्या है? हमारी इच्छाये और कामनाये हमारा मल है !और आत्मा और अनात्मा को ना जानना ही विक्षेप है ! इनको दूर किये बिना योग  सिद्ध नही हो सकता अर्थात योग नहीं हो सकता हमरे चार पर्वतक है योग के महृषि पतंजलि, भगवान कृष्ण, महात्मा बुद्ध, कुंडलेश्वर गुरु गोरक्ष नाथ बाबा गुरु देव का मार्ग आज भी साधक को पूर्ण अखण्ड महायोग में ले जाने जाने मे समर्थ ही नहीं बल्कि दिशा और दशा बदलने की छमता रखता है ! केवल स्रद्धा और समर्पण के दो पुष्प चढाने है छन में मिल जाता है जब तक  हमे वास्तविक ज्ञान नही होगा तब तक हम भटकते रहेंगे   सही योग वही है जो आपको स्वम् से स्वम की अनुभूति करा दे अन्यथा सब  धोखा है ! प्रार्थना करें उस दिव्य ऊर्जा शक्ति को प्राप्त करने  की जो सदा से प्राप्त है उस को ना पाकर हम जन्म जन्म से दुःख  में डूबे है प्रारब्ध वस्  तनावग्रस्त है  उस योग को  प्राप्त होते ही आप ऐश्वर्य सुख, समृद्धि, ज्ञान, एवं आनंद के महासमुंदर मे गौता लगाते है प्रयाग राज से आशीर्वाद मागे आंतरिक प्रयाग को जानने के लिए  यही महातीर्थ कुम्भ का  फल है योग आसन पर जब विश्व  लटू है जब वास्तविक योग को संसार जानेगा तो भारत विश्व गुरु बनेगा उस कुण्डलिनी सक्ति को जाने बिना योग नही हो सकता योग को ना जानकर भर्मित हुए लोग                         देखा  देखि करें योग छीजे काया बाढ़े रोग प्रति दिन स्वास परसवास में मंथन चल रहा है और तिरवेनी संगम हो रहा है इसे जानने की आवश्यकता है अपनी घर वापसी का मार्ग है योग और यही तीर्थ राज का फल  है ! लोककल्याण  के लिए कार्य मे लगा है ट्रस्ट  अहंकार  वस्  जो लोग  इस संसार  को  अपना  मान  लेते  है उन्हें  किस प्रकार  कि ह्रदय  पीडा  निराशा  एवम  दुख  भोगना  पड़ता है उसे  आप  जानते  है !            इस  यंतरणा भरे अस्तित्व से बचाने  के लिए  सुख ' समृद्धि  ज्ञान एवं  आनंद का  अनूठा  संगम के रूप  मे  अखंड महायोग के द्वारा देश  भर मे कार्य  कर रहे  है          इसी  श्रृंख्ला  मै  ट्रस्ट ने  कुछ  पुस्तकों  का भी प्रकासन किया है  जिसमे  मुख्य  है ( 1)शक्तिपात रहस्य (2) चक्र रहस्य( 3)योग  रह्स्य (4)प्राण रहस्य (5) मन  रहस्य (6)आधार  साधना (7)नाद  रहस्य  (8)सुखी जीवन  का आधार  यज्ञ (9)कुम्भ  महापर्व आदि  पुस्तको  के माधयम  से जन जन  में  प्रेरणा  देकर ज्ञान  को प्रसारित कर रहे है ! ये जीवन गुरु देव की धरोवर है  हमारा  सम्पूर्ण  जीवन लोककल्याण  के लिए  समर्पित  है ! ट्रस्ट  द्वारा  अन्य  चलने  वाली               कार्य शालए (1) अखंड महायोग : प्राचीन ऋषि परम्परा द्वारा शक्ति पात द्वारा  कुण्डलिनी  का जागरण योग  का वास्तविक  सवरूप प्रस्तुत  करना सुख  मय  जीवन  एवम  कल्याण कारि मृत्यु के विज्ञानं को  स्वम  अनुभूति वाले  योग  से परिचय  कराकर भ्रान्ति   मिटाना योग  से महायोग  कि ओर  जाने  का सम्पूर्ण विज्ञानं   (2)सर्वाबाधा मुक्ति  यज्ञ :   यज्ञ  द्वारा  आहुति  देना पक्षिओ  को दाना "बंदर एवम  अन्य  वन प्राणी  कि सेवा चींटी  मछली  सेवा गो  सेवा अन्न भोजन   द्वारा साधु सेवा आदि       (3)गुरुकुलधरोहर :हमारी  खोई  हुईं   विद्याओं को पुन स्थापित  कर विधार्थियो  को तैयार  करना समाज  की सेवा में लगाना ओर स्वालम्बी  बनाना रोजगार  के  साधन प्रदान करना        ...  .    ...... (4) धर्मसंस्कृति :गो  गंगा गीता   गायत्री  एवम  धर्म  के मानबिन्दु की रक्षा  पुनर  उत्थान एवं प्रचार  प्रसार  करना !                 (5)आरोग्य  वाटिका  साधक संजीवनी :    साधको को  रोग  मुक्त  कर रोगी  से  योगी से  महायोगी  बनाना सभी को रोग मुक्त  करना  शारीरिक  मानसिक एवं  आत्मिक  सम्पूर्ण  स्वस्थय  प्राकर्तिक चिकित्सा  योग  आयुर्वेद एवं वैकल्पिक  चिकित्सा  द्वारा समाज  को लाभ  पहुंचना आदि आदि          .    .

            हरि ओम ततसत

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