ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में तीसरा अंतरराष्ट्रीय इस्ट्रो एरॉय गाइनी टीचिंग कोर्स कार्यशाला के तहत व्याख्यानमाला शुरू हो गई, जिसमें बृहस्पतिवार को भारत समेत विभिन्न देशों से जुटे विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कैंसर सर्विक्स के कारण,बचाव व उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बृहस्पतिवार को एम्स में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडिएशन ओंकोलॉजी व इंडियन सोसाइटी ऑफ रेडिएशन ओंकोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में सर्विक्स कैंसर पर आधारित चार दिवसीय इंटरनेशनल कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ हो गया। इस मौके पर अपने संदेश में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि हमारे देश में सर्विक्स कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला दूसरा सबसे कॉमन कैंसर है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो.रवि कांत ने चिंता जताई कि इस कैंसर की रोकथाम की जा सकती है, बावजूद इसके जागरूकता की कमी और लापरवाही की वजह से सर्विक्स कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या बहुत अधिक है। इस अवसर पर फ्रांस के डा.क्रिस्टिनी ने बताया कि कैंसर सर्विक्स में क्लिनिकल एग्जामिनेशन की अहम भूमिका होती है। बीमारी की स्टेज का पता लगाने में क्लिनिकल परीक्षण जरूरी है, साथ ही बताया कि बीमारी की सही अवस्था का पता लगने पर मरीज के सही ट्रीटमेंट को प्लान करने में मदद मिलती है। एम्स ऋषिकेश के डा.पंकज शर्मा ने बताया कि यूट्रस और सर्विक्स की संरचना संबंधी विस्तृत जानकारी दी। टाटा मैमोरियल हास्पिटल मुंबई के डा.उमेश महंत सेट्टी ने कैंसर सर्विक्स के पेशेंट को विकिरण चिकित्सा देने से पहले जरूरी सावधानियों के बारे में बताया, जिससे मरीज को विकिरण चिकित्सा का लाभ मिल सके। कार्यशाला के समन्वयक व रेडिएशन ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.मनोज गुप्ता ने बताया कि यह कोर्स100 चिकित्सकों के लिए आयोजित किया जाता है, इस बार इसमें भारत समेत नेपाल, बर्मा, वियतनाम, श्रीलंका, मलेशिया बांग्लादेश आदि देशों के 115 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर डा.राजेश पसरीचा, डा.दीपा जोसेफ, डा.स्वीटी गुप्ता, डा.रचित, डा.अजय आदि मौजूद थे।

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