ऋषिकेश,14मार्च। श्री जगन्नाथ आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रामानुजाचार्य हंस देवाचार्य की सड़क दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु के उपरांत हरिद्वार ऋषिकेश के भक्तों में आश्रम की पीठ पर संचालन किए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। उल्लेखनीय है कि जगन्नाथ आश्रम की मुख्य पीठ ऋषिकेश में है, तथा उसकी सहायक संस्थाएं हरिद्वार  दिल्ली आदि स्थानों पर भी संचालित की जा रही है। जिनकी व्यवस्था हंस देवाचार्य द्वारा की जा रही थी। जिन्होंने अपना उत्तराधिकारी अपने जीवन काल में किसी को नियुक्त नहीं किया था ।लेकिन अचानक उनकी मौत हो जाने के बाद,  आश्रम व्यवस्था संचालन को लेकर विरोध शुरू हो गया है। हालांकि हरिद्वार में हंस देवाचार्य के निधन के उपरांत आयोजित की गई, संतो द्वारा षोडशी समारोह के दौरान हंसदेवा आचार्य के उत्तराअधिकारी के रूप में लोकेश तथा अरुण को कार्यवाहक के रूप में घोषित किया गया है। लेकिन ऋषिकेश जगन्नाथ आश्रम के सेवक मंडल के सदस्यों द्वारा उक्त व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा गया, कि ऋषिकेश जगन्नाथ आश्रम की मुख्य पीठ है ।जिनके उत्तराअधिकारी को नियुक्त किए जाने का अधिकार ऋषिकेश सेवक मंडल को है। बृहस्पतिवार को आश्रम में आयोजित की गई सेवक मंडल द्वारा बैठक के दौरान सेवकों ने कहा कि ऋषिकेश आश्रम के उत्तराधिकारी पद पर ऋषिकेश के सेवक मंडल द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के अनुसार ही घोषित किया जाएगा। जिस की बैठक होली के उपरांत आयोजित की जाएगी। ऋषिकेश जगन्नाथ आश्रम के सेवक मंडल के सदस्यों ने बैठक में रामानुजाचार्य हंसदास की मौत पर भी सवालिया निशान लगाएं है।जिन्होंने उनकी मौत की  भी जांच कराए जाने की मांग उत्तर प्रदेश सरकार से की है। बैठक में यह भी कहा गया कि आश्रम की व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए हरिद्वार ऋषिकेश के कुछ लोगों को गुमराह कर रहे हैं आश्रम के मुख्य ट्रस्टी विनोद शर्मा का कहना था इस संबंध में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी बातचीत की जाएगी। क्योंकि उन्हें भी इस संबंध में गुमराह किया गया है। बैठक में गोवर्धन लाल चावला, मनोज कालरा ,चरणजीत लाल धींगड़ा, राजेश शर्मा, चेतन शर्मा, महेश शर्मा, दौलत राम, भोला डंग, सहित काफी संख्या मे भगत भी उपस्थित थे।

Post A Comment: