देहरादून। उत्तराखंड में पहले चरण में चुनावों के एलान ने राजनीतिक दलों की मशक्कत बढ़ा दी है। पूरी तरह से होमवर्क न होने के चलते सभी दलों के भीतर टिकटों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। भाजपा और कांग्रेस में खींचतान का दौर चल रहा है। हां, बसपा में जरूर कुछ सुकुन की स्थिति में है। बसपा उम्मीदवार की घोषणा चुनावों के पहले ही हो चुकी है। हालांकि, हालिया दिनों में कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए एक नेता घोषित पार्टी उम्मीदवार के लिए चुनौती पेश करते दिख रहे हैं। इधर, सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन के चलते सपा यहां उम्मीदवारी तय करने के झंझट से पूरी तरह मुक्त है।
राज्य स्थापना के बाद से हरिद्वार लोकसभा सीट पर अब तक हुए तीन चुनावों में सपा, कांग्रेस और भाजपा ने अपना परचम लहराया है। वर्तमान में यह सीट भाजपा की झोली में है, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक संसद में यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सिटिंग सांसद होने के नाते स्वाभाविक तौर पर पार्टी में उनकी दावेदारी मानी ही जा रही है। लंबा राजनीतिक अनुभव उनकी ताकत है। लेकिन टिकट की उनकी राह निष्कंटक नहीं है। 

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