स्वामी डी. आर. पार्वतीकर जी महाराज की पावन स्मृति में दो दिवसीय संगीत महोत्सव का आयोजन

आत्मिक शान्ति का उत्कृष्ट माध्यम है संगीत -स्वामी चिदानन्द सरस्वती

17 मार्च, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन आश्रम में 16 वाँ दो दिवसीय वीणा महाराज संगीत महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य और मार्गदर्शन में  वीणा महाराज संगीत समिति द्वारा संगीत महोत्सव का आयोजित किया गया।
16 वाँ वीणा महाराज संगीत महोत्सव का उद्घाटन परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, उज्जैन से आये वोकल गायक पंडित योगेश देवले जी, दिल्ली से आयीं वोकल गायिका अदिति सरकार, मुम्बई से आयी वोकल गायिका विदूषी पूर्वी पारिख, दिल्ली से आये बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी, दिल्ली से आये सितार वादक डाॅ गोपाल कृष्ण शाह, दिल्ली से आये सितार और वायलीन वादक प्रोफेसर राजीव वर्मा, दिल्ली से आये पं संतोष नाहर, तबला वादक श्री हितेन्द्र श्रीवास्तव, हारमोनियम श्री गौरव बिष्ट, तबलावादक डाॅ विजय कृष्ण एवं अन्य कलाकारों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
परमार्थ निकेतन में आज की शाम शास्त्रीय संगीत एवं देश का संगीत बना रहे को समर्पित की गयी। सभी कलाकारों ने मंत्र मुग्ध करने वाला संगीत प्रस्तुत किया। जिसे सुनकर सभी देशी विदेशी श्रद्धालु झूमने लगे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारत की अनुपम देन है। आधुनिक काल में भारतीय संगीत के पुनरूत्थान का श्रेय विष्णु नारायण भातखण्डे को दिया जाता है।  भारत में संगीत सम्मेलनों के आयोजनों की नींव डालने का श्रेय भी इनका है। भारत में प्राचीन काल से ही संगीत का इतिहास समृद्ध रहा है। संगीत की इस प्रेरक और दैवीय प्रेरणा के सूत्रधार भगवान शिव और सरस्वती जी है। संगीत, मनुष्य के आतंरिक भावों की सुखद अभिव्यक्ति है जिसका विकास मानवीय सभ्यता के विकास के साथ जुड़ा है। संगीत आत्मा की खुराक है जो जीवन को शान्त और समृद्ध बनाती है।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी परमार्थ निकेतन सत्संग भवन में वीणा महाराज संगीत समारोह का आयोजन किया गया। वीणा महाराज समिति के अध्यक्ष पं हरि कृष्ण साह जी ने बताया कि शास्त्रीय संगीत के इस समारोह में भारत के विभिन्न प्रांतों से आये कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैै। इस समिति के संरक्षक परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज मुख्य अतिथि तथा श्री दीपेन्द्र चैधरी जी, आयुक्त आबकारी तथा महानिदेशक सूचना, उत्तराखण्ड सरकार और अन्य गणमान्य अतिथियों पावन सान्निध्य में कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में पधारे संगीत प्रेमियों को स्वच्छता और पर्यावरण सरंक्षण का संकल्प कराया एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। साथ ही सन्देश दिया कि संगीतकार अपने सुरों से देश भक्ति के सरगम और संगम के लिये सदैव प्रयास करते रहें। स्वामी जी महाराज ने कहा कि आज देश के युवाओं में देशभक्ति के भाव भरने की बहुत जरूरत है।
आज की दिव्य गंगा आरती मे सभी संगीतज्ञों, आयोजन समीति के सदस्यों एवं अनेेक संगीत प्रेमियों ने सहभाग किया।

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