प्रयागराज/ऋषिकेश, 09 फरवरी। परमार्थ निकेतन शिविर, अरैल सेक्टर 18 प्रयागराज में चिकित्सा के विविध आयामों द्वारा कुम्भ में आये श्रद्धालुओं को चिकित्सा सेवा उपलब्ध करायी जा रही है। इसी क्रम में आज परमार्थ निकेतन  के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्रीमद् भागवत कथाकार श्री अनुराग शास्त्री जी महाराज, श्री मोहन जी और निर्वतमान मुख्य सचिव श्री राजीव रंजन जी, श्री विनोद बागड़ोड़िढ़या जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने नेत्र शिविर का उद्घाटन किया। मेदान्ता के चिकित्सों द्वारा विगत कई दिनों से चिकित्सा सुविधायें प्रदान की जा रही है।
 चिकित्सा शिविर में मेदान्ता से आये डाॅ शुभांग, श्री पुनित श्रीवास्तव, डाॅ मनचन्दा, महावीर सेवा सदन से आये नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ जितेन्द्र गंगलानी, डाॅ हार्दिक गंगलानी और एक्यूप्रेशर शोध संस्थान से आये थेरेपिस्ट श्री मोहन जी एवं अन्य चिकित्सकों द्वारा कुम्भ में आये श्रद्धालुओं को चिकित्सा के विविध आयामों द्वारा चिकित्सा सुविधायें प्रदान की जा रही है।
  नेत्र रोग विशेषज्ञों ने आज 500 से अधिक रोगियों का परिक्षण किया गया तथा निःशुल्क चश्मे एवं दवाईयाँ वितरित की। मेदान्ता से आये चिकित्सकों ने अब तक 1000 से अधिक रोगियों का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, ईसीजी, एबीपी एवं पीएफटी (पल्मोनरी फंक्शन टेस्स्ट) तथा एम्बुलंेस सुविधा प्रदान की गयी तथा यह सुविधायें पूरे कुम्भ के दौरान निःशुल्क प्रदान की जायेगी। मेदान्ता के चिकित्सक कुम्भ मेला के विभिन्न सेक्टरों में जाकर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधायें प्रदान कर रहे है।
 परमार्थ निकेतन में श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से ज्ञान की धारा श्री अनुराग शास्त्री महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही है। वही दूसरी ओर भक्ति संगीत के अन्तर्गत अमेरिका और जर्मनी से आये कुम्भ मेला कीर्तन ग्रुप भक्ति संगीत की प्रस्तुति दे रहे है। अमेरिका से आये श्री विश्वम्भर शेठ ’’मायापुरी’’ द्वारा ’’भाव आॅफ द कुम्भ’’ पर विशेष प्रस्तुति दे रहे है। इस दल में अमेरिका और जर्मनी से आये 20 से अधिक भक्तों ने राधे-राधे और जय श्री राम का कीर्तन एवं वैदिक मंत्रों का गान करके पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’जीते-जीते रक्त दान और जाते-जाते नेत्र दान। संगम के पावन तट पर कथाओं और पूज्य संतों के उद्बोधनों के माध्यम से चरित्र निर्माण का संदेश दिया जा रहा है। नेत्र यज्ञ और चरित्र यज्ञ चले साथ साथ। वास्तव में यही भक्ति, ज्ञान और कर्म का संगम है। उन्होने कहा कि कथाकार बने पर्यावरण के पैरोकार और चिकित्सक बने स्वास्थ्य के साथ स्वच्छता के पैरोकार। स्वामी जी महाराज ने भारत की युवाओं से आह्वान किया वे रक्तदान अवश्य करे। आपके द्वारा दिया रक्त किसी की ज़िन्दगी बचा सकता है। उन्होने नेत्र दान एवं अंगदान के लिये भी प्रेरित किया। स्वामी जी महाराज ने कहा कि हमारा तो सूत्र ही है ’राम काज कीन्हें बिना मोहि कहाँ विश्राम।’ जब तक राम काज पूर्ण न हो विश्राम कहाँ। राम सेवा ही हमारा विश्राम बने। प्रभु सेवा ही हमारी शक्ति हो; शान्ति हो। मानव सेवा ही माधव सेवा है।’
श्री अनुराग शास्त्री जी महाराज ने कहा कि साधना और सेवा के माध्यम से ही जीवन के परम लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। साधना और सेवा का वास्तविक संगम हम संगम के पावन तट परमार्थ निकेतन शिविर में देख रहे हैं। यहां से पर्यावरण, प्रकृति और व्यक्ति सभी की सेवा की गंगा निरन्तर प्रवाहित हो रही है। वास्तव में यह भक्ति, ज्ञान और कर्म का संगम है।
चिकित्सकों ने कहा कि संगम की धरती पर आकर सेवा का वास्तविक अर्थ समझ में आया। यहां आकर पूज्य संतों के सान्निघ्य में जीवन को सच्चे अर्थों में जीना सीखा है।
चिकित्सा शिविर में पैरामेडिकल स्टाफ मेदान्ता से आये नदीम मलिक, राजीव फतेह मसीह, देव कुमार महावीर सेवा सदन से आये राजेश पात्ता, राजेश हर्पल, पूल्टू मण्डल अपनी उत्कृष्ट सेवायें प्रदान कर रहे है।

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