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देहरादून। उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित आराकोट क्षेत्र के गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान हुए हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे में मृतक पायलट और को-पायलट के शव देहरादून लाए गए। यहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। गुरूवार सुबह सहस्रधारा हेलीपैड से रवाना हुआ हेलीकॉप्टर आराकोट पहुंचा। यहां से हेलीकॉप्टर बड़कोट के लिए रवाना हुआ। जिसमें दोनों पायलटों के शव जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लाए गए। जहां उन्हें एसडीआरएफ कार्यालय में श्रद्धांजलि दी गई।
बता दें कि बुधवार को आपदा प्रभावित आराकोट क्षेत्र के गांवों में राहत सामग्री पहुंचा रहा एक हेलीकॉप्टर मोल्डी गांव के पास तार से टकराकर क्रैश हो गया था। हादसे में हेलीकॉप्टर के परखच्चे उड़ गए और इसमें सवार पायलट एवं इंजीनियर के साथ ही एक स्थानीय युवक की मौत हो गई थी। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीमों ने दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर से तीनों लोगों के शव बरामद किए।
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देहरादून। पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखण्ड में प्लास्टिक वेस्ट (च्संेजपब ॅंेजम) को रोकने के लिए राज्य का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब बड़ा कदम उठाने जा रहा है। बोर्ड ने 10 बड़ी कम्पनियों को चिन्हित किया है जिनके उत्पाद राज्य में प्रदूषण फैलाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार पाए गए हैं। बोर्ड अब इन कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछने जा रहा है कि वह अपने उत्पादों से होने वाले प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है।
उत्तराखण्ड के लिए वेस्ट मैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. देहरादून से ही हर रोज 269 टन कूड़ा निकलता है तो हरिद्वार से 255 टन कूड़ा. इसमें प्लास्टिक वेस्ट में सबसे ज्यादा ब्रांडेड कम्पनियों के उत्पादों का होता है। उत्तराखंड सरकार ने पॉलिथीन की थैलियों पर तो प्रतिबंध लगाया दिया है लेकिन इन उत्पादों से पैदा होने वाले प्लास्टिक कूड़े का कोई हल नहीं है।
दरअसल ठोस प्रबंधन नियम 2016 के अन्तर्गत मिली 2018-2019 की रिपोर्ट को लेकर अब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के भी हाथ पांव फूल गए हैं। प्लास्टिक एंव म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट बोर्ड के नोडल अधिकारी प्रदीप कुमार जोशी ने बताया कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अब 10 बड़ी कम्पनियों को नोटिस भेजने जा रहा है। इन कंपनियों से यह पूछा जाएगा कि उनके उत्पादों के प्लास्टिक वेस्ट को इकट्ठा करने और उसके डिस्पोजल के लिए वह क्या करने जा रहे हैं।
जनवरी में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (ब्च्ब्ठ) ने राज्य सरकारों को पर्यावरणीय प्रदूषण से लड़ने की योजनाओं पर काम करने के निर्देश दिए थे. अप्रैल तक मांगी गई रिपोर्ट में प्लास्टिक के सिस्टमेटिक डिस्पोजल के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश थे लेकिन 25 राज्यों ने यह रिपोर्ट नहीं दी थी। उत्तराखण्ड में प्लास्टिक वेस्ट डिस्पोजल को लेकर काम कर रही एनजीओ गति फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल कहते हैं कि सवा करोड़ से भी कम की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 6-7 करोड़ पर्यटक आते हैं और वह उसी अनुपात में प्लास्टिक वेस्ट भी छोड़ जाते हैं. वह कहते हैं कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का यह कदम देर से ही उठाया जा रहा लेकिन जरूरी कदम है. उत्तराखंड को प्लास्टिक वेस्ट को मना करना ही होगा।
एक तथ्य यह भी है कि प्रदेश में पॉलिथीन को बैन करने का सरकार का आदेश एक साल भी जमीन पर नहीं उतर पाया है और देहरादून समेत पूरे राज्य में धड़ल्ले से पॉलिथीन की पन्नियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि जब छोटे दुकानदारों के प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सरकार प्रतिबंध नहीं लगवा पा रही तो बड़ी कंपनियों पर शिकंजा कैसे कसेगी।
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पत्नी से झगड़े के बाद युवक ने होटल में लगाई फांसी
देहरादून। परिजनों के साथ मसूरी घूमने आए एक युवक ने पत्नी से झगड़ा होने के बाद लाइब्रेरी बाजार क्षेत्र के एक होटल में फांसी लगा ली। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। 
पुलिस के अनुसार,जे-37 मंगोलपुरी, दिल्ली निवासी 33 वर्षीय श्याम कुमार पुत्र अतर सिंह अपने साढू व साले के परिवार के साथ रात को मसूरी पहुंचे। उन्होंने लाइब्रेरी बाजार स्थित होटल रतन कमल में कमरे लिए। 
श्याम कुमार के साले दीपक ने पुलिस को बताया कि कैम्पटी फॉल घूमने के बाद होटल आकर खाने-पीने के बाद श्याम अपनी पत्नी ज्योति से झगड़कर मारपीट करने लगा तो उनके दोनों बच्चे चिल्लाने लगे। 
तब दीपक और उसके दूसरे बहनोई शिवकांत श्याम के कमरे में गए। उन्होंने पति-पत्नी को शांत कराया। इसके बाद पत्नी ज्योति अपने दोनों बच्चों के साथ अपने भाई के कमरे में आ गई। बाद में श्याम ने पत्नी ज्योति को मोबाइल पर मैसेज किया कि वह उसके दोनों बच्चों को उसके कमरे में भेज दे नहीं तो वह आत्महत्या कर लेगा। इसके बावजूद ज्योति वहां नहीं गई। 
सुबह करीब सात बजे उन्होंने श्याम का कमरा खटखटाया तो नहीं खुला। खिड़की से झांककर देखा तो श्याम पंखे से लटका हुआ था। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 
मृतक की पत्नी ज्योति ने पुलिस को बताया कि उनकी शादी को ग्यारह साल हो गए थे। श्याम बेरोजगार था। ज्योति ही पूरे परिवार का खर्च उठाती है और वही श्याम को घूमने के लिए मसूरी लाई थी। ज्योति ने बताया कि श्याम शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता था।
क्षेत्र से डेंगू के निरमूल के लिए अनगरखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश का सेवन प्लस अभियान विभिन्न मलीन बस्तियों में जारी aहै। मुहिम के तहत पिछले तीन दिनों में अब तक विभिन्न इलाकों में करीब पांच सौ घरों में सर्वे किया जा चुका है, साथ ही इस दौरान डेंगू की आशंका वाले 35 मरीज चिह्नित किए गए, उनके खून के नमूने लेकर एम्स संस्थान में परीक्षण किया जाएगा। अभियान के तहत विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने लोगों को डेंगू बुखार को लेकर जागरुक भी किया।                                                                                                                                                            एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में संस्थान की आउटरीच सेल की ओर से नगर क्षेत्र में सेवन प्लस अभियान शुरू किया गया है। निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि जनजागरुकता से ही डेंगू की रोकथाम संभव है, लिहाजा संस्थान के स्तर पर ऋषिकेश नगर क्षेत्र की विभिन्न मलीन बस्तियों में सर्वे अभियान शुरू किया गया है, जिससे रोग पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके। निदेशक पद्मश्री प्रो.रवि कांत ने बताया कि सात दिवसीय मुहिम के तहत आउटरीच सेल की अगुवाई में मेडिकल, नर्सिंग टीम, मेडिकल सोशल वर्कर, स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टास्क फोर्स तैयार कर बीते सोमवार से अब तक सर्वहारानगर,शांतिनगर, वनखंडी आदि इलाकों में लगभग  500 घरों में लोगों को डेंगू को लेकर जागरुक कर चुकी है, इस दौरान बुखार के 35 मरीज चिह्नित किए गए,जिनका ब्लड सैंपल लेकर एम्स में परीक्षण किया जाएगा।                                                                         एम्स के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेखा किशोर ने बताया ​कि अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, प्रशासन के साथ ही आम नागरिकों को भी आगे आना होगा,तभी नगर क्षेत्र में डेंगू की रोकथाम की जा सकती है। संस्थान के आउटरीच सेल के नोडल अधिकारी डा. संतोष कुमार ने बताया कि सेवन प्लस अभियान के तहत बृहस्पतिवार को मायाकुंड क्षेत्र और इसके बाद चंद्रेश्वरनगर चंद्रभागा आदि इलाकों में जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद द्वितीय चरण में अन्य मलीन बस्तियों को भी सेवन प्लस अभियान में शामिल कर संर्वेक्षण किया जाएगा। अभियान में एम्स नर्सिंग कॉलेज के डा. राजेश कुमार, डा. योगेश बी. स्वास्थ्य विभाग में आशा सुपरवाइजर एसएस यादव आदि शामिल हैं।                                                                                                                                                                                                   डेंगू के लक्षण-                                                                                                                                                                                              -अकस्मात तेज सिर दर्द व बुखार का होना, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढ़ता है, जी मचलाना एवं उल्टी होना, गंभीर मामलों में नाक, मुहं, मसूड़ों से खून आना अथवा त्वचा पर चकत्ते उभरना आदि ।                                                 यह सावधानियां बरतें-                                                                                                                                                                                         -डेंगू फैलाने वाला मच्छर खड़े हुए साफ पानी में पनपता है, कहीं आपके घर व आसपास पानी तो जमा नहीं है, जैसे कूलर, पानी की टंकी, पक्षियों के पीने के पानी का बर्तन, फ्रिज की ट्रे, फूलदान, नारियल का खोल,टूटे हुए बर्तन व टायर आदि।                                                                                                     पानी से भरे हुए बर्तनों व टंकियों आदि को ढक कर रखें।                                                                                                                                                -कूलर को खाली करके सुखा दें। डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है, बुखार उतारने के लिए पैरासीटामोल ले सकते हैं। एस्प्रीन या इबुब्रेफेन का इस्तेमाल अपने आप नहीं करें, कुशल चिकित्सक की सलाह लें। डेंगू से ग्रस्त प्रत्येक रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती।
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करोड़ो के लॉकर व करोड़ों की बेनामी संपत्ति के चलते विजलेंस टीम दबोचा
जोशीमठ के प्रभागीय वनाधिकारी किशन चंद की जांच प्रदेश स्तर पर अभी चल ही रही थी कि बुधवार को केंद्रीय विजलेंस की टीम ने उन्हें दबोच लिया और अपने साथ दिल्ली ले गयी। बता दें कि किशनचंद अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे थे मगर याचिका दायर करने से पहले ही विजलेंस की टीम ने दबोच लिया। आपको बताते चलें कि उनके 18 लाॅकर पकड़े गए हैं जिसमें करोड़ों रूपये हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2000 में भी विजिलेंस ने किशन चंद की खुली जांच की थी और उसमें पाया था कि किशन चंद के पास अरबों रुपए की संपत्ति है और जब विजिलेंस इसकी संपत्ति कोई जांच नहीं कर सका तो विजिलेंस ने आखिर में यह लिख दिया कि किशन चंद के पास अकूत संपत्ति है तब नया नया राज्य बना था और जांच रिपोर्ट अधिकारियों ने रफा दफा कर दी थी। यह जांच रिपोर्ट ही आज गायब है।
वर्तमान सरकार मे भी किशनचंद सरकार और उच्चाधिकारियों की आंखों का तारा बना हुआ था लेकिन किशन चंद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले इतने जबरदस्त थे कि विजिलेंस की राह को रोकना असंभव था। नतीजा केंद्रीय विजलेंस् ने दबोच ही लिया।
लिहाजा विजिलेंस ने एक साल किशन चंद की पूरी घेराबंदी कर लेने के बाद सोच समझकर हाथ डाला और आज परिणाम सबके सामने है।
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देहरादून। उत्तरकाशी के मोरी तहसील में बादल फटने के आई आपदा से टौंस और यमुना नदी में उफान आने की वजह से राज्य की 5 जल विद्युत परियोजनाओं को बंद करना पड़ा है। इसकी वजह से प्रदेश को रोज 120 लाख यूनिट का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जाहिर तौर पर विद्युत उत्पादन घटने की वजह से इसकी आपूर्ति भी प्रभावित हुई और विद्युत विभाग को अब तक करोड़ों रुपये का नुकघ्सान हो चुका है। हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
मोरी में बादल फटने की वजह से टौंस और यमुना नदी पर स्थित 5 बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को बंद करना पड़ा। जिससे रोज 12 मिलियन यूनिट का नुकघ्सान राज्य को हो रहा है। दरअसल टौंस और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ने की वजह से पानी में सिल्ट की मात्रा बढ़ गई है। इसके चलते 240 मेगावाट की छिबरो, 120 मेगावाट की खोदरी, 51 मेगावाट की ढालीपुर, 33.75 मेगावाट के ढकरानी और 30 मेगावाट की कुल्हाल जल विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन ठप हो गया है।
 इस मामले में यूजेवीएनएल के एमडी एसएन वर्मा का कहना हे कि  जब भी इस तरह की बाढ़ जैसी स्थिति होती है तो उसमें मलबा बहुत बढ़ जाता है और मशीनों को चलाना सुरक्षित नहीं रहता। वर्मा के अनुसार 3000 पीपीएम तक सिल्ट के साथ मशीनें चल सकती हैं और अभी यह 11000 पीपीएम तक बढ़ गया है। अब फिर से उत्पादन करने के सिल्ट कम होने का इंतजार करना होगा।
मोरी तहसील के करीब 52 गांव में भी बिजली आपूर्ति अब भी ठप पड़ी है और अगले 10 दिन में इसे सुचारु होने की उम्मीद भी नहीं है। इस आपदा से विद्युत आपूर्ति करने वाले निगम यूपीसीएल को करीब 2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मोरी तहसील में 33 किलोवाट की 26 किलोमीटर और 11,000 किलोवाट की 18 किलोमीटर की लाइनें ध्वस्त हो गई हैं। इसके अलावा 8 बड़े ट्रांसफार्मर्स को भी नुकसान पहंचा है। यूपीसीएल के एमडी बीसीके मिश्रा कहते हैं कि इलाकघ्े में बिजली आपूर्ति की कोशिशें की जा रही हैं। त्यूणी और आराकोट बेस स्टेशन में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है और प्रभावित गांवों तक भी जल्द ही बिजली पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं।
ऋषिकेश,  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके महर्षि महेश योगी के चैरासी कुटिया बीटल्स आश्रम के दिन अब सुधरने की उम्मीद बनी है। केन्द्रीय पर्यटन मत्रांलय ने, ‘अपनी धरोहर अपनी पहचान’ योजना के तहत चैरासी कुटिया को गोद लेने के लिए उत्तराखंड पर्यटन मंत्रालय से समझौता किया है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह ने उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को एक समझौता पत्र सौंपा है, जिसमें उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित चैरासी कुटिया और रुद्रप्रयाग के नारायण मंदिर को गोद लेने पर समझौता हुआ है। गौरतलब है कि महर्षि महेश योगी ने भारतीय योग को पहली बार विदेशियों से रूबरू करवाया था। उन्होंने ऋषिकेश के गंगा तट पर 60 के दशक में प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति को मिलाकर एक नगर बसाया था। शंकराचार्य नगर. इसमें गोल गुम्बदाकार 84 कुटिया का निर्माण किया गया था जो आज भी अद्भुत कारीगरी के अनूठे मेल की मिसाल है।
60 और 70 के दशक में मशहूर बैंड बीटल्स महेश योगी के शिष्य बने थे और फिर वह ऋषिकेश भी पहुंचे। बीटल्स की लोकप्रियता पर सवार होकर भारतीय योग और आध्यात्म पश्चिम पहुंचा और तब पहली बार पूर्व और पश्चिम का मिलन हुआ।
बीटल्स के चाहने वाले पश्चिमी दुनिया में बहुत थे और उनके योग अपनाने के बाद दुनया भर के विदेशी भारत का रुख करने लगे और फिर भारतीय योग पूरी दुनिया में तेजी से फैला। विदेशियों में आज भी इस आश्रम को देखने का बड़ा क्रेज है। आज भी सात समंदर पार से विदेशी ऋषिकेश में स्थित 84 कुटिया का रुख करते हैं।
30 साल बाद 2015 में राजा जी टाइगर रिजर्व पार्क ने विश्व भर के योगप्रेमियों के लिए महर्षि महेश योगी के आश्रम को खोल दिए और यहां देसी-विदेशी पर्यटकों को घूमने की इजाजत दे दी। इसके बाद इसे पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए पर्यटन विभाग ने कई सांसकृतिक आयोजन भी किए. ब पूरे विश्व से बीटल्स के दीवाने यहां आकर इस धरोहर का दीदार करते हैं।